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चंद्रग्रहण के बाद क्यों लगे भूकंप के झटके, विशेषज्ञों ने कहा रिस्क जोन में हैं देश के कुछ हिस्से

By Shakti Prakash Shrivastva on November 9, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव की आवाज में रिपोर्ट सुनने के लिए आडियो बटन पर क्लिक करें।

पूर्वाञ्चलनामा न्यूज, लखनऊ। साल 2022 के अंतिम चंद्रग्रहण के ठीक बाद मध्यरात्रि में देश के उत्तरी राज्य खासकर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, नार्थ ईस्ट और दिल्ली-एनसीआर तक के इलाके में लोगों को भूकंप के झटके लगे। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 6.3 मापी गई। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक इस भूकंप का केंद्र देश के किसी हिस्से की बजाय नेपाल के मणिपुर में था।

भूकंप का सर्वाधिक प्रभाव नेपाल में दिखा। दोती जिले में एक मकान के गिरने से लगभग आधा दर्जन लोगों की मौत की खबर है। नेपाली सेना राहत और बचाव कार्य में लगी हुई है। चीन के सीमावर्ती इलाकों में भी झटके महसूस किये गए। रात मे 1 बजकर 57 मिनट पर लखनऊ के विकास नगर में आफिस का काम कर रही साफ्टवेयर इंजीनियर छोटी ने बकायदे भूकंप का एहसास किया। मेज हिलने फिर बंद पंखे के हिलने से पहले तो डर गई। घर में सोये लोगों को जगाया। थोड़ी देर बाद में खबरों से जानकारी मिली कि भूकंप ही था। इसी तरह लगभग रात 1 बजकर 58 मिनट के लगभग बहराइच में भी पत्रकार बी शुक्ल ने भी झटके महसूस किया। बुधवार की सुबह करीब 6.27 बजे उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में 4.3 तीव्रता के भूकंप आने की खबर है। लखनऊ और दिल्ली में करीब 5.7 मैग्नीट्यूड के झटके लगे।

विज्ञान की मुताबिक चंद्रग्रहण के बाद भूकंप आने के सीधे तौर पर कोई संबंध भले न हो लेकिन चूंकि मान्यता है कि चंद्रग्रहण जल और समुद्र को प्रभावित करता है। इसलिए इसके प्रभाव से बाढ़, तूफान और भूकंप की संभावना बढ़ जाती है। दरअसल चंद्रग्रहण के दौरान चंद्रमा पृथ्वी के सर्वाधिक नजदीक होता है। इसलिए चंद्रमा का गुरुत्वकर्षण बल समुद्री ज्वार को प्रभावित करता है जिससे भूकंप की संभावना बढ़ जाती है। भूकंप के पिछड़े आंकड़ों पर गौर करें तो इस तर्क की पुष्टि मिलती है। चंद्रग्रहण के पहले या बाद में कई बार भूकंप के झटके लगे है। अपने देश में 2001 की 21 जनवरी को चंद्रग्रहण था जबकि 26 जनवरी को भूकंप आया था। अलास्का में 9 नवंबर 2003 को ग्रहण 17 नवंबर को भूकंप, जापान में 28 अक्टूबर 2004 को ग्रहण और 23 अक्टूबर को भूकंप, सुमात्रा में 3 मार्च 2007 को ग्रहण और 6 मार्च को भूकंप, इंडोनेशिया में 21 फरवरी 2008 को चंद्रग्रहण और 21 फरवरी को ही भूकंप और 8 नवंबर 2022 को भारत-नेपाल मे चंद्रग्रहण और उसी दिन रात को भूकंप। ऐसे और भी उदाहरण हैं।

इस भूकंप के झटके को लेकर कानपुर आईआईटी के सीनियर प्रोफेसर और भूगर्भवेत्ता प्रो. जावेद एन मलिक ने मीडिया में बड़ा खुलासा किया है। उनके मुताबिक 2015 में भी नेपाल में आए 7.8 से 8.1 तीव्रता वाले भूकंप के झटके में लगभग आठ हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और 20 हजार से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। उससे हिमालय रेंज में टेक्टोनिक प्लेट अस्थिर हो गई है। इसके चलते अब लंबे समय तक इस क्षेत्र मे ऐसे भूकंप आते रहेंगे। प्रो मालिक ने आशंका जताई है कि हिमालयन रेंज में खासकर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में7.8 और 8.5 के बीच की तीव्रता के भूकंप कभी भी आ सकते हैं। इसका असर पूरे उत्तर भारत में पड़ेगा। उत्तराखंड में खासतौर पर गढ़वाल और कुमायूं वाले इलाके रेड जोन में हैं। ये इलाके भूकंप के केंद्र हो सकते हैं।

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