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चौंकिए नहीं, ये सच है : महाराष्ट्र में है ‘ईडी’ की सरकार

By Shakti Prakash Shrivastva on July 4, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

‘ईडी’, हिन्दी-अंग्रेजी शब्दकोश के इस शब्द को यदि भारतीय राजनीति का सर्वाधिक चर्चित शब्द कहा जाए तो अतिश्योक्ति न होगी। पश्चिम बंगाल चुनाव से लेकर महाराष्ट्र में नयी सरकार गठन तक यह शब्द खासा सुर्खियों में रहा। सोमवार को जब महाराष्ट्र विधानसभा में शिंदे सरकार का बहुमत परीक्षण हो रहा था उस समय भी विपक्षी खासकर शिवसेना नेता ईडी-ईडी के लगातार नारे लगाते रहे। विपक्षियों के इस नारे पर राज्य के उपमुख्यमंत्री और पूर्व में मुख्यमंत्री रहे बीजेपी नेता देवेन्द्र फड़नवीस ने सदन में कहा कि आप सब सही कह रहे हैं हम सभी भी स्वीकारते हैं कि राज्य में ईडी की ही सरकार है। विस्तार से समझाते हुए उन्होंने कहा कि ‘ई’ का मतलब एकनाथ शिंदे और ‘डी’ का मतलब देवेन्द्र फड़नवीस यानि की एकनाथ शिंदे और देवेन्द्र फड़नवीस की सरकार। किसी को कोई शक भी नहीं होना चाहिए क्योंकि सरकार ने बहुमत परीक्षण में 164 मत हासिल कर यह प्रमाणित भी कर दिया है। बहुमत परीक्षण में विपक्षियों को महज 99 वोट से संतोष करना पड़ा। महाराष्ट्र में सत्ता पर काबिज शिंदे सरकार को बहुमत के लिए 144 वोट चाहिए थे जबकि इसके एवज में उसे इतने अधिक मिले। पार्टियों द्वारा सदन में मौजूद रहने के लिए जारी ह्विप के बावजूद 22 ऐसे  विधायक रहे जिन्होंने वोटिंग से अपने को अलग रखा। कांग्रेस के 10 विधायक जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण, जिटेश अंतापूरकर, जीशान सिद्दीकी, प्रणति शिंदे, विजय वदेत्तीवार, धीरज देशमुख, कुणाल पाटील, राजू आवाले, मोहनराव हॅम्बरदे और शिरीष चौधरी शामिल हैं, ने वोटिंग नही की। इसके अलावा एनसीपी, एआइएम आइएम और सपा के विधायकों ने भी वोट नही डाला। महाराष्ट्र विकास अघाडी के तीन विधायकों ने शिंदे के पक्ष में वोट किया। ऐसा नही कि ये खेल सिर्फ एनसीपी और कांग्रेस में ही हुआ। शिवसेना विधायक भी अंतिम पहर शिंदे के साथ चले गए। उद्धव ठाकरे गुट के संतोष बांगड और श्याम सुंदर शिंदे ने शिंदे का पक्ष लिया वहीं शिंदे गुट के गोवा के साथी राहुल पाटील और कैलाश पाटील वापिस उद्धव गुट में पहुँच गए। शिंदे के खिलाफ वोट भी डाला। सदन में पहले ध्वनिमत से मत से होनेवाला फ्लोर टेस्ट विपक्षियों के विरोध के चलते नहीं हुआ। बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने हेड काउंट के जरिए मतदान कराया जिसमें एक-एक सदस्यों से पूछा गया कि वो किसके साथ हैं। अपने सम्बोधन में फड़नवीस ने यह भी कहा कि हमारी सरकार में सत्ता संघर्ष नही होगा। क्योंकि आज से ढाई साल पहले शिवसेना के साथ हमारे गठबंधन को सरकार के लिए जनादेश मिला था। साजिश के तहत सरकार नही बनने दिया गया। अब हमे एक बार फिर मौका मिला है और अब एक सच्चा शिवसैनिक सीएम बना है। हमारी सरकार ने रविवार को स्पीकर के चुनाव में भी जीत हासिल की थी और आज विश्वास मत भी जीत लिया।

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