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करहल में हुआ अखिलेश के कराहने का इंतजाम !

By Shakti Prakash Shrivastva on October 14, 2024
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                                                                                            शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

मैनपुरी जिले की करहल विधानसभा सीट एक अरसे से समाजवादी पार्टी के प्रभाव वाली सीट मानी जाती है। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के साँसद चुने जाने के पहले तक वही इस क्षेत्र का विधानसभा में प्रतिनिधित्व करते थे। पार्टी के प्रभाव वाली सीट होने और अपनी विधानसभा सीट के नाते यह सीट होने वाले उपचुनाव में सपा की खासकर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के लिए प्रतिष्ठा की सीट बन गयी है। लेकिन इस सीट को सतारूढ़ बीजेपी खासकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। वर्षों से सपा के आधिपत्य वाली इस सीट को योगी हर हाल में इस बार जीतना चाहते है। ऐसा कर वो बीते लोकसभा चुनाव में मिली हार के सियासी गम को भी दूर करना चाहते हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश में बीजेपी के पक्ष में बदलते सियासी समीकरण का भी प्रदर्शन करना चाहते हैं।

प्रदेश की दस विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव होने है। दस में से नौ सीटों पर चुनाव इसलिए हो रहे हैं कि यहाँ का प्रतिनिधित्व कर रहे विधायक बीते लोकसभा चुनाव में चुनाव जीतकर सांसद हो गए है। उनके सांसद बन जाने से ये सीटें रिक्त हो गई है। इसके अलावा एक सीट ऐसी है जहा के विधायक को किसी मामले में सजा हो गई है और वो जेल में है। इन सभी सीटों में पाँच पर समाजवादी पार्टी और शेष पाँच पर बीजेपी और उनके सहयोगियों का कब्जा था। इस बार बीते लोकसभा चुनाव में मिली सफलता से उत्साहित विपक्ष जहा अपनी जीत सुनिश्चित मान रहा है वही बीजेपी खेमा भी हरियाणा विधानसभा में मिली प्रचंड जीत से उत्साह से लबरेज है।

इनमे कुछ विधानसभा सीटे ऐसी है जहां की जीत को बीजेपी ने अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ रखा है। ऐसी ही सीटों में से एक करहल भी है। पिछले दो दशकों से यहाँ पर मुलायम सिंह यादव और कुनबे का ही प्रभाव रहा करता था। यहाँ के लिए बीजेपी के रणनीतिकार इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में विशेष रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। बीजेपी अपने इस विशेष तैयारी से यह संदेश देना चाहती है कि अखिलेश यादव पर मानसिक दबाव प्रभावी हो। इससे अखिलेश अपनी ही विधानसभा क्षेत्र में अधिकाधिक समय देने को विवश हो जाएंगे। अन्य नौ विधानसभा सीटों के लिए चल रहे उनके प्रचार अभियान को खासा धक्का लगेगा। ऐसा होने से बीजेपी को सुकून मिल जाएगा। भले ही चुनाव का बिगुल नहीं बजा है लेकिन सियासी दबाव का विगुल फूंका जा चुका है। बीजेपी के लिए करहल एक बार फिर से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र बिंदु में आ गया है। साल 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी करहल राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र बिंदु में था। वजह ये थी कि यही से सपा के प्रमुख अखिलेश यादव चुनाव जीतकर विधायक बने थे। अब देखना ये दिलचस्प होगा कि आखिर यहाँ के लिए बीजेपी के रणनीतिकारों ने क्या रणनीति बनाई है।

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