Responsive Menu
Add more content here...
July 22, 2026
ब्रेकिंग न्यूज

Sign in

Sign up

बीजेपी के कल्याणकारी ‘कल्याण’

By Shakti Prakash Shrivastva on August 22, 2021
0 614 Views

शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

अपनी राष्ट्र्वादी विचारधारा के साथ 1951 में बनी भारतीय जनसंघ फिर 1977 में जनता पार्टी और 1980 में भारतीय जनता पार्टी के रूप में अस्तित्व में आई भारतीय जनता पार्टी का आज मौजूदा स्वरूप जो कुछ भी दिख रहा है उसमें कल्याण सिंह का अहम स्थान है। वो कल्याण सिंह जिसने मूल्यविहीन हो चुके राजनीति में भी कभी मूल्यों को नही छोड़ा। बल्कि मूल्यों के लिए एक नहीं दो-दो बार पार्टी तक छोड़ दी थी। पार्टी ही नहीं बाबरी मस्जिद विंध्वंश के बाद 6 दिसंबर 1992 को घटना की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ दी थी। कल्याण सिंह पार्टी के उन नेताओं में शुमार थे जिन्होने पार्टी की नींव रखी थी। 1967 में भारतीय जनसंघ के बैनर तले अलीगढ़ जिले के अतरौली विधानसभा क्षेत्र से प्रतिनिधित्व करने वाले श्री सिंह 1980 तक लगातार क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे। 1980 में जब भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ तो अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और कल्याण सिंह जैसे ही चंद नाम थे जिन्होने पार्टी को अयोध्या में विवादित श्रीराम जन्मभूमि मसले से जोड़कर मुद्दे को पूरे देशभर में प्रचारित-प्रसारित करने की योजना बनाई। बाद में देश के बहुसंख्यक हिन्दू जनमानस के आराध्य भगवान श्रीराम की जन्मभूमि के मामले को देश के हिन्दू समाज ने अपने अस्तित्व से जोड़कर देखने लगा और परिणाम ये हुआ कि शुरुआत में दो सांसदों वाली भारतीय जनता पार्टी आज राज्य और केंद्र में बहुमत की सरकार बनाने में कामयाब हो गयी। यही नहीं पार्टी आज दुनिया में सबसे अधिक प्राथमिक सदस्य संख्या वाली पार्टी बन गयी है। पार्टी की जब उत्तर प्रदेश में पहली बार सरकार बनी तो 24 जून 1991 को कल्याण सिंह ही मुख्यमंत्री बनाए गए। दूसरी बार 21 सितंबर 1997 से 21 फरवरी 1998  तक श्री सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। व्यक्तिपरक लोकतान्त्रिक मूल्यों से समझौता न करने की वजह से दो बार इन्हे पार्टी भी छोड़ना पड़ा। 2013 में दूसरी बार पार्टी में आए। पार्टी ने इनके पुराने कद को देखते हुए राजस्थान और हिमांचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया। कल्याण सिंह की छवि एक तेज तर्रार  हिंदुवादी और प्रखर वक्ता के रूप में थी। पार्टी में इन्हे अटल बिहारी वाजपेयी के बाद दूसरे सबसे अधिक जनप्रिय नेता के तौर पर मान्यता थी। कारसेवकों पर जब 1990 में मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में गोलियां चलायी गईं तो उनके जवाब में पार्टी ने कल्याण सिंह को ही आगे किया। कल्याण सिंह ने भी पार्टी की जिम्मेदारियों को बखूबी अंजाम देते हुए ऐसे हालात पैदा किए कि 1991 में उत्तर प्रदेश में पार्टी सत्ता पर काबिज हो गयी और पार्टी की प्रदेश में पहली सरकार बनी। सरकार बनने श्री सिंह ने अपनी धार्मिक आस्था और भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा के चलते पूरी मंत्रिपरिषद समेत अयोध्या पहुँच न केवल रामलला के दर्शन किए बल्कि भव्य राममंदिर निर्माण की शपथ भी ली।  जब 1992 में 6 दिसंबर को अयोध्या में विवादित ढांचा ज़मींदोज़ हुआ तो बतौर मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने ही कारसेवकों पर गोलियां चलाने की अनुमति नही दी। बल्कि जिम्मेदारियो को स्वीकारते हुए विध्वंश के बाद अपने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा सौंप दिया। 5 जनवरी 1932 को अलीगढ़ के अतरौली गाँव में जन्में श्री सिंह का पार्टी हित में किए गए अवदानों को भूलना आसान नहीं है। लगभग दो महीने तक अस्पताल में इलाजरत रहने के बाद 21 अगस्त,2021 की रात जब श्री सिंह ने अपनी अंतिम सांस ली तो एक बारगी समूची पार्टी स्तब्ध हो गयी। लखनऊ पहुँच कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न केवल इनके पार्थिव शरीर के सम्मुख जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की बल्कि पार्टी स्थापना संबंधी अवदानों को याद किया। प्रधानमंत्री ने इस मौके पर इनके कार्य व्यवहार पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वो जीवनभर लोक कल्याण के लिए जीए। पार्टी और देश के लिए उन्होने अपने को समर्पित कर दिया। माता-पिता द्वारा दिये गए ‘कल्याण’ नाम को बखूबी सार्थक किया। सच यही है कि कल्याण ने पार्टी के लिए सचमुच कल्याणकारी काम किया। जब तक पार्टी यानि भारतीय जनता पार्टी का वजूद रहेगा कल्याण सिंह के पार्टी हितकारी क्रियाकलापों की गूंज सुनाई देती रहेगी।

 

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *