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लखीमपुर हिंसा : कभी भी जा सकती है मंत्री ‘टेनी’ की कुर्सी ! सीएम के तेवर पर पीएम ले सकते है फैसला

By Shakti Prakash Shrivastva on October 6, 2021
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लखीमपुर, (संवाददाता)। बीजेपी के नेता और प्रवक्ता अपने केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र ‘टेनी’ को बचाने और विपक्ष पर वार की चाहे जितनी भी कोशिश क्यों न कर लें, लेकिन टेनी का मंत्री पद पर बहुत समय तक बने रहना अब मुश्किल लग रहा है। इस आशय को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान से भी बखूबी समझा जा सकता है जिसमें उन्होने कहा है कि दोषी चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे मामलों में अपने विशेष तेवर के लिए मशहूर योगी ने इस संबंध में अपनी चिंता से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अवगत करा दिया है। वैसे भी इस प्रकरण से न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बल्कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा काफी आहत हैं। रविवार को हुई इस हिंसा के संदर्भ में उत्तर प्रदेश सरकार ने भी गृह मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट भेज दी है। जिस तरह से टेनी को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा दिल्ली तलब कर उन्हे फटकारे जाने की खबरे मिल रही है। उससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि किसान आंदोलन से दबाव में चल रही केंद्र सरकार इस मुद्दे से अपना और किरकिरी नहीं कराना चाहती है। ऐसे में मंत्री टेनी की मुश्किलें बढ्ना लाजिमी है। दिल्ली के गलियारे में इस बात की चर्चा ज़ोरों पर है कि प्रधानमंत्री मोदी इस बाबत कभी भी बड़ा फैसला ले सकते हैं।

चूंकि ये समूचा मामला केंद्र सरकार के मंत्री और उनके परिवार से जुड़ा हुआ है। इसलिए माना जा रहा है कि मंत्री पुत्र आशीष मिश्रा पर पुलिस और जांच एजेंसी की जांच प्रक्रिया शुरू होते ही केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के खिलाफ कार्यवाही का दबाव बनने लगेगा। चुनावी वर्ष में जब राज्य में विधानसभा के चुनाव होने में महज चंद महीने शेष है ऐसे में राज्य सरकार कत्तई ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी जिससे उसके ऊपर पार्टी से जुड़े दोषियों को बचाने का आरोप लगे। हालांकि बावजूद इसके मामले की आंच से क्या संगठन और क्या सरकार दोनों ही झुलस रहे है। इसलिए सरकार और भाजपा का संगठन दोनों ही जांच प्रक्रिया, वायरल वीडियो की सच्चाई की जांच का सहारा लेकर काफी फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं। जानकारों का मानना  है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानो से हुए सुलह की घोषणा के बाद मामला ठंडा पड़ने लगा था, लेकिन वायरल हुए वीडियो ने इसे फिर से भड़का दिया है। इससे मामले को ठंडा होने में वक्त लग सकता है। कृषि मंत्री तोमर भी घटना की निंदा करते हुए मानते हैं कि , मीडिया और सोशल मीडिया में जो कुछ प्रसारित हो रहा है, उस आधार पर इसे अच्छा नहीं कहा जा सकता। उत्तर प्रदेश पुलिस भी मुख्यमंत्री के तेवर से भली भांति परिचित है। मुख्यमंत्री ने स्वयं कह दिया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। वह चाहे कितना भी बड़ा चेहरा क्यों न हो? ऐसे में डीएम, एसपी और राज्य सरकार के अधिकारी मामले को लेकर संवेदनशील हैं। अब चूंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ चुकी है ऐसे में अब जल्द ही कार्रवाई में तेजी देखने को मिलेगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्रीय गृह राज्यमंत्री टेनी का पुत्र आशीष मिश्रा इस मामले में आरोपी बनाया गया हैं। लखीमपुर खीरी के पुलिस अधिकारियों ने भी आशीष की भूमिका पर सवाल खड़ा किया है। इस पूरे मामले को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारी लगातार राज्य सरकार के संपर्क में हैं। ऐसा नहीं है कि इस प्रकरण से केवल बीजेपी ही तनाव में है। इससे बीजेपी के सहयोगी दल भी खासे आहत हैं। सहयोगी दलों में अपना दल पटेल के नेता आशीष पटेल, जद(यू) के नेता केसी त्यागी को भी यह मामला काफी कुछ अखर रहा है। पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी लगातार उत्तर प्रदेश, केंद्र और भाजपा सरकार की परेशानी बढ़ा रहे हैं। अभी भी बीजेपी के नेताओं को लग रहा है कि इस घटना से जुड़े अभी कुछ और वीडियो आ सकते हैं। इस तरह की आशंका पुलिस के अधिकारियों की भी है। उन्हें लग रहा है कि इनके आने से परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए भी ऐसा माना जा रहा है कि पार्टी या सरकार अपनी छवि और खराब होने से बचाने  के लिए टेनी को जल्द से जल्द मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा सकता है।

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