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April 21, 2026
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सीएम सिटी में ‘ग्राउंड’ की अंडरग्राउंड क्राइम !

By Shakti Prakash Shrivastva on May 30, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

                   गोरखपुर ही नहीं पूरे प्रदेश में पिछले छः सालों से आर्गेनाइज्ड क्राइम पर फिलहाल लगाम लगा हुआ है। क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने कार्यकाल की शुरुआत में ही यह एहसास करा दिया था कि प्रदेश में अपराध और अपराधियों पर जीरो टालरेंस की नीति अपनाई जाएगी। अपराधी या तो अपराध से किनारा कर लें या प्रदेश छोड़ दे वरना..। इसका ही असर रहा कि प्रयागराज शूटआउट की घटना को छोड़ प्रदेश में कोई बड़ी वारदात नहीं हुई। लेकिन मुख्यमंत्री योगी के अपने ही शहर गोरखपुर में ग्राउंड यानि जमीन का अंडरग्राउंड धंधा बखूबी फल-फूल रहा है। अंडरग्राउंड इसलिए कहा गया है कि अब फिलहाल पहले जैसे खुलकर जमीन का कारोबार नहीं हो रहा है। ऐसे में इससे जुड़े अपराधी टाइप व्यापारी व्यापार के लिए अलग रास्ता अख्तियार किये हुए हैं। जिले में टापटेन माफियाओं की सूची में शामिल चाहें माफिया अजीत शाही, सुधीर सिंह का नाम हो या राकेश यादव या विनोद उपाध्याय का सभी जमीन यानि ग्राउंड के धंधे से ही जुड़े हैं। हाँ इनलोगों ने समय की नजाकत को समझते हुए अपने कार्य व्यवहार में एक तब्दीली की है कि अब ये आपस में टकराते नहीं है। आपसी सूझ-बूझ से राजनीतिक दलों की तरह कामन मिनिमम प्रोग्राम के तहत एक रास्ता ढूंढ निकाला है। अब ये इलाका बाँट लेते है। कोई दूसरे के इलाके में बिना रजामंदी दखल नहीं करता हैं। इनका एक वसूल बन गया है कि जमीन के धंधे में ये एक दूसरे के पैर पर पैर नही रखेंगे। न चाहते हुए भी इनके इस धंधे में रहने की मुख्य वजह जमीन की कीमतों में असामान्य उछाल का आना है। क्योंकि जबसे मुख्यमंत्री ने गोरखपुर और आस-पास के इलाके में विकास की गति तेज की है। जमीन की कीमतों में खासा बढ़ोत्तरी हुई है। दूसरा एक कारण ये भी है कि अब वो बखूबी जान गए हैं कि अपराध के रास्ते पर रहते हुए बहुत दिनों तक नहीं बच सकते हैं। लिहाजा उनके लिए यह मुफीद क्षेत्र है। यहा उनके अतीत की वारदातों से अर्जित सुर्खियों में रहे नाम का भी फायदा मिल रहा है।  आपस में इनके बंटे इलाकों में ताल रामगढ़, बजरंग कॉलोनी से लेकर कालेसर तक का हिस्सा माफिया सुधीर सिंह और गुलरिहा, शाहपुर, पिपराइच इलाके का इलाका माफिया विनोद उपाध्याय के पास है। इसके अलावा राकेश यादव भी इस इलाके में दखल रखता है लेकिन वो सिर्फ उसी जमीन पर हाथ डालता है, जिसमें इन दोनों माफियाओं का नाम नहीं होता। इस इलाके के जमीनों पर मुखर विवाद ज्यादा नहीं होता क्योंकि यहां पर जमीन खरीदने वालों में बड़ी संख्या बिहार, झारखंड के लोगों की है।

अगर किसी वजह से किसी जमीन पर कोई विवाद हो जाए जिसमें एक ही जमीन पर एक से अधिक माफियाओं की संलिप्तता हो तो ऐसे में इनकी लखनऊ में बकायदे पंचायत होती है। वहाँ के फैसले को सभी मानते हैं। ऐसे में सीएम सिटी में ये अपराधी अपराध तो नहीं कर रहे है लेकिन अप्रत्यक्ष तौर पर आपराधिक पहचान की ही बदौलत अंडरग्राउंड रहते हुए अंडरग्राउंड इस व्यापार को ठीक ढंग से कर रहे हैं। हालांकि इन दिनों अजीत शाही, सुधीर सिंह सरीखे माफिया सलाखों के पीछे है और विनोद उपाध्याय बाहर है तो उनको अंदर करने के लिए पुलिस ढूंढ रही है।

 

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