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यूपी:कैबिनेट मंत्री ब्रजेश पाठक ने लिखा पत्र: लखनऊ में कोविड की स्थिति बेहद गंभीर, अफसर सुस्त

By Purvanchalnama Desk on April 13, 2021
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लखनऊ-उत्तर प्रदेश में कोरोना के कारण हालात खराब होते जा रहे हैं। सबसे बुरा हाल है राजधानी लखनऊ का। लखनऊ में हर दिन कोरोना के रिकॉर्ड मामले सामने आ रहे हैं। इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ब्रजेश पाठक का एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस पत्र में उन्होंने प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव और चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को राजधानी लखनऊ के बारे में लिखकर चिंता व्यक्त की है औऱ कहा है कि अगर हालात जल्द न सुधरे तो फिर से लॉकडाउन लगाना पड़ सकता है।वायरल हो रहे इस अत्यंत गोपनीय पत्र में ब्रजेश पाठक कहते हैं कि लखनऊ में इस समय स्वास्थ्य सेवाओं का अत्यंत चिंताजनक हाल है। पिछले 1 हफ्ते से उनके पास सैकड़ों ऐसे फोन आ रहे हैं, जिन्हें समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने पत्र में ये भी दावा किया है कि कोरोना की टेस्ट रिपोर्ट मिलने से 4 से 7 दिन का समय लग रहा है। मरीजों को एंबुलेंस भी समय से नहीं पा रही है।

कोरोना से बिगड़े हालात-ब्रजेश पाठक

पत्र में खुद का एक अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी विधानसभा क्षेत्र के पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ योगेश प्रवीण की अचानक तबीयत खराब हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने खुद सीएमओ से फोन पर बात की लेकिन फिर भी घंटों तक एंबुलेंस नहीं मिल पाई और डॉ योगेश प्रवीण का निधन हो गया। ब्रजेश पाठक ने कोरोना मरीजों के लिए पर्याप्त संख्या में बेड न होने पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि हर रोज शहरर में 4 से 5 हजार मरीज मिल रहे हैं लेकिन कोविड अस्पतालों में बेड की संख्या अत्यधिक कम है। इतना ही नहीं राजधानी लखनऊ में प्राइवेट पैथोलॉजी सेंटरों में कोविड की जांच बंद करा दी गई है।उन्होंने कहा कि वर्तमान हालात में जो को मरीज अन्य बीमारियों से पीड़ित है, उन्हें बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है कि कोविड पैनडेमिक की वजह से उन्हें उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर लखनऊ में हालातों पर जल्द ही नियंत्रण नहीं पाया गया तो कोरोना की रोकथाम के लिए लखनऊ में लॉकडाउन लगाना पड़ सकता है।मंत्री ने लिखा है कि अंसतोषजनक हालात को देखते हुए आठ अप्रैल को वह सीएमओ ऑफिस जा रहे थे, लेकिन अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) के आश्वासन पर नहीं गए। फिर भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। जरूरी है कि कोविड बेड बढ़ाए जाएं, पर्याप्त जांच किट दी जाएं, प्राइवेट लैब को कोविड जांच का फिर अधिकार मिले। गंभीर रोगियों को तुरंत भर्ती कर गंभीर रोगों से ग्रसित नॉन कोविड मरीजों का उचित इलाज हो।


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