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मायावती की बदली ‘चाल’ ने उड़ाई कई दलों की नींद

By Shakti Prakash Shrivastva on May 1, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

उत्तर प्रदेश मौजूदा सियासत में भले ही मायावती और उनकी पार्टी बहुजन समाज पार्टी हाशिये पर दिख रही हो। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब उनकी सियासी समीकरणों की बदौलत उन्हे एक-दो बार नहीं बल्कि चार-चार बार प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने का अवसर मिला। यूं तो समय जीवन के हर पक्ष में मजबूत भूमिका रखता है लेकिन सियासत में इसकी अहमियत कुछ अधिक ही होती है। एक समय ऐसा भी था जब भारतीय जनता पार्टी जैसी कद्दावर पार्टी ने मायावती और उनकी पार्टी बहुजन समाज पार्टी से गठजोड़ किया था। आज आलम ये है कि प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी का महज एक विधायक है और वो भी पार्टी की बजाय अपने व्यक्तिगत रसूख की वजह से विधायक बना है। बलिया से विधायक उमाशंकर सिंह भले ही बहुजन समाज पार्टी के विधायक है लेकिन उनकी सियासी और सामाजिक गलियारे में साख पार्टी से इतर व्यक्तिगत है। बावजूद पार्टी सुप्रीमो मायावती की सोशल इंजीनियरिंग वाली चाल से प्रदेश का हर सियासी दल सहमा-सहमा रहता है। पहले इनकी इन्ही चालों पर सरकारे बनती रही है। लेकिन अब समय तेजी से बदला है। लिहाजा इस तरह के प्रयोग अब कितने कारगर होंगे कहना मुश्किल है। अमूमन स्थानीय निकाय चुनाव में बहुत रुचि न लेने वाली मायावती इस बार के चुनाव में खासा रुचि लेते दिख रही है। मायावती ने पूरे प्रदेश में अकेले दम पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। इस बार प्रदेश की सभी 17 नगर निगमों में पार्टी ने अपना प्रत्याशी उतारा है। इस बार मेयर प्रत्याशी के चयन में भी पार्टी ने नया समीकरण इस्तेमाल किया है। पार्टी ने 17 में से 11 पर मुस्लिम प्रत्याशी उतार कर एक बारगी सियासी समीकरणों की चर्चा के केंद्र में तो आ ही गई है। सांप्रदायिक दलों को खासकर इस निर्णय से खासी परेशानी हो रही है। मायावती ने रविवार को अपने ट्वीट में भी इस बात का खुलासा किया है।
उन्होंने अपने ट्वीट में साफ शब्दों में कहा कि यूपी निकाय चुनाव के अन्तर्गत 17 नगर निगमों में मेयर पद के लिए हो रहे चुनाव में बीएसपी द्वारा मुस्लिम समाज को भी उचित भागीदारी देने को लेकर यहाँ राजनीति काफी गरमाई हुई है, क्योंकि उससे खासकर जातिवादी एवं साम्प्रदायिक पार्टियों की नींद उड़ी हुई है। बसपा सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय की नीति व सिद्धान्त पर चलने वाली अम्बेडकरवादी पार्टी है तथा उसी आधार पर यूपी में चार बार अपनी सरकार चलाई। उन्होंने कहा कि बसपा में मुस्लिम व अन्य समाज को भी हमेशा उचित प्रतिनिधित्व दिया गया है। अतः लोगों से अपने हित पर ज्यादा व विरोधियों के षडयंत्र पर ध्यान न देने अपील है। निकाय चुनाव का परिणाम चाहे कुछ भी हो लेकिन सिर्फ मायावती के एक निर्णय ने सियासी दलों में सरगर्मियाँ तो पैदा कर ही दी है।

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