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UP सियासत : अखिलेश के टार्गेट पर केशव ही क्यों

By Shakti Prakash Shrivastva on September 12, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

राजनीति के जानकारों की माने तो राजनीति में न तो कोई किसी का स्थायी मित्र होता है और न ही कोई स्थायी शत्रु। जो कुछ भी होता है वो किसी न किसी अर्थ के लिए ही होता है। अगर आज उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में पूर्व मुख्यमंत्री (Ex.CM) और समाजवादी पार्टी (Samajwaadi Party) प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) बीजेपी (BJP) नेता और उपमुख्यमंत्री (Dy.CM) केशव प्रसाद मौर्य (KeshavPrasad Maurya) को अपने राजनीति के टार्गेट पर रखे हुए हैं तो कहीं न कही उसके पीछे कोई कहानी होगी। यहाँ हम उसी कहानी की संभावित कारणों की चर्चा करने जा रहे है। सच्चाई है कि बीजेपी (BJP) में केशव प्रसाद मौर्य (KeshavPrasad Maurya) पिछड़ी जाति की नुमाइंदगी करने वाले एकमात्र सर्व लोकप्रिय नेता हैं।

अखिलेश (Akhilesh Yadav) भी पिछड़ों की ही नुमाइंदगी करते हैं। ऐसे में अखिलेश (Akhilesh Yadav) यह जानते हुए भी कि केशव या पार्टी के सौ विधायक पार्टी नही छोड़ेंगे। लेकिन एक मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए केशव को सौ विधायक लाने पर मुख्यमंत्री (CM) बनाने सरीखे आफ़र दे रहे हैं। चूंकि जब राज्य में बीजेपी (BJP) की पहली सरकार 2017 में बनी थी तब केशव (KeshavPrasad Maurya) यह मान रहे थे कि मुख्यमंत्री (CM) का पद उन्हे ही मिलेगा। लेकिन बदली परिस्थितियों में केशव (KeshavPrasad Maurya) को उपमुख्यमंत्री (Dy.CM) पद से ही संतोष करना पड़ा।

कहीं न कही यही कारण था कि सरकार बनने के बाद भी केशव (KeshavPrasad Maurya) और मुख्यमंत्री (CM) योगी आदित्यनाथ के रिश्ते बहुत मधुर नही रहे। इसी आंतरिक मनभेद को अखिलेश (Akhilesh Yadav) कैश करने की कोशिश में लगातार हैं। दूसरी बार जब राज्य में बीजेपी (BJP) की सरकार बनी तो इस बार स्थितियाँ पहले से इतर थीं। केशव (KeshavPrasad Maurya) अपना चुनाव हार चुके थे फिर भी पार्टी ने उनके अवदान और पार्टी के प्रति निरंतर जुड़ाव का ख्याल रखते हुए दुबारा उप मुख्यमंत्री (Dy.CM) बनाया। बस इन्ही स्थितियों-परिस्थितियों का अखिलेश (Akhilesh Yadav) ने विश्लेषण किया। यह तय किया कि ऐसे केशव पर दबाव बनाने का लगातार प्रयास किया जाना चाहिए।

राजनीति के जानकार ऐसा मानते हैं कि जितना केशव की बीजेपी (BJP) में उपेक्षा संबंधी खबरें आएंगी उसे प्रदेश का पिछड़ा वर्ग अपने आत्मसम्मान से जोड़ते हुए बीजेपी (BJP) से नाराज होगा। यह भी संभव है कि योगी आदित्यनाथ के रवैये से नाराज विधायक कभी पूर्व की भांति एक बार फिर विरोध में एकजुट हो ही जाएँ। ऐसा हो तो केशव (KeshavPrasad Maurya) को सपोर्ट कर मुख्यमंत्री (CM) बनाने का दांव सही भी साबित हो सकता है।

इसी सब की वजह से विधानसभा में अखिलेश (Akhilesh Yadav) ने केशव को ललकारा भी था। मामला इतना गंभीर हो गया था कि मुख्यमंत्री (CM) को मामला शांत कराना पड़ा था। कुछ वजहों से अखिलेश (Akhilesh Yadav) लगातार केशव (KeshavPrasad Maurya) को सकारात्मक या नकारात्मक किसी भी तरह की टिप्पणियाँ करके सुर्खियों में बनाए रखना चाहते हैं। वो भी महज संभव होने की एक उम्मीद के आधार पर। बहरहाल भविष्य में क्या होगा ये भविष्य के गर्भ में है। अखिलेश (Akhilesh Yadav) को लगता है कि ऐसा करने से उनके पार्टी या उनके भविष्य के लिए कुछ बेहतर हो सकता है तो निःसन्देह उन्हें करना ही चाहिए। बाकी वख्त बताएगा ही।

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