शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव
जानवरों के मालिकाना को लेकर भी बकायदे कानून है। जैसे हाथी-घोडा-कुत्ता आदि के लिए संबंधित विभाग में पंजीकरण कराकर लाइसेंस दिया जाता है। लेकिन प्रशासन की सख्ती और जागरूकता के अभाव में सामान्य तौर पर व्यवहार में ऐसा दिखता नहीं है कि कोई जानवर मालिक पंजीकरण कराता है। अगर कोई कराता भी है तो उनकी संख्या बहुत काम है। लेकिन नियम की जानकारी तब होती है जब कोई घटना हो जाती है। जैसे गोरखपुर में पिछले दिनों चिलुआताल इलाके के मोहम्मदपुर माफी गांव में एक धार्मिक जुलूस के दौरान जुलूस में चल रहा एक हाथी अचानक हिंसक हो गया। हिंसक हाथी ने एक मासूम सहित तीन लोगों की जान ले ली और कई लोगों को घायल कर दिया।
मुख्यमंत्री का शहर होने के कारण प्रशासन में हड़कंप मच गया। लेकिन जब जांच पड़ताल शुरू हुई तो अधिकृत तौर पर हाथी का कोई वारिस ही नहीं मिला। क्योंकि उसका पंजीकरण ही नहीं है। कायदे से हाथी का पंजीकरण वन विभाग में होना चाहिए। लेकिन वन विभाग के पास संबंधित हाथी के बारे में कोई जानकारी नहीं है। घटना के बाद हरकत में आया वन विभाग अब इस बाबत कमेटी गठित कर रहा है। अपनों को खोने वाले परिजन भी मायूस हैं। कार्रवाई हो तो किस पर हो। अधिकृत तौर पर भले ही हाथी का कोई वारिस नहीं लेकिन दबी जुबान इलाकाई हालांकि सब कुछ बता रहे है। लेकिन खुलकर किसी के सामने न आने की वजह से फिलहाल कार्रवाई सुनिश्चित नहीं हो पा रही है।
अभी किसी की तरफ से पुलिस को कोई तहरीर भी नहीं दी गई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव ग्रोवर की मुताबिक पुलिस को फिलहाल कोई तहरीर नहीं मिली है। जांच कर सम्यक कार्रवाई की जाएगी। हाथी जैसे जानवरों के पंजीकरण का जिम्मेदार वन विभाग के मुखिया मुख्य वन संरक्षक विकास यादव की मुताबिक हाथी मालिक के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। इस संदर्भ में एक कमेटी भी बना दी गई है।