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रामपुर जेल से कहाँ गए आजम-अब्दुल्ला?

By Shakti Prakash Shrivastva on October 23, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

                  समय होत बलवान, ये कहावत यूं ही नही कही गई है। बहुतेरे ऐसे उदाहरण है जो इसे प्रमाणित करते हैं। इसे समझने के लिए सपा के फायर ब्रांड राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व काबीना मंत्री मोहम्मद आजम खान और उनके परिवार को ही लें। एक समय था इस परिवार का रामपुर जिले और आस-पास के इलाके की सियासत में सिक्का चलता था। लेकिन आज वही परिवार जेल की सलाखों में कैद है। आजम खान, उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम तीनों ही रामपुर जेल में बंद हैं। लेकिन रविवार को अलसुबह ही आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला को रामपुर जेल से कहीं अन्य भेज दिया गया। पता चला की आजम को सीतापुर और अब्दुल्ला को हरदोई जेल में भेजा गया है जबकि उनकी पत्नी तंजीन फातिमा अभी भी रामपुर जेल में ही बंद हैं।

हुआ ये कि एक मामले में 18 अक्टूबर को पूर्व मंत्री मो.आजम खान उनकी पत्नी पूर्व सांसद डॉ. तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम खान को अदालत ने सात-सात वर्ष कारावास की सज़ा सुनाई थी एवं 50-50 हजार का जुर्माना लगाया था। अदालत के इसी आदेश के अनुपालन में इन तीनों परिवारीजनों को रामपुर जिला जेल भेजा गया था। लेकिन किन्ही परिस्थितिवश रविवार को अलसुबह रामपुर जिला कारागार में अचानक हलचल बढ़ गई। प्रशासन की गाड़ियों का जमावड़ा लग गया। पता चला कि मो. आजम खान और अब्दुल्ला आजम को रामपुर जेल से कही दूसरी जेल भेजा जाएगा जबकि डॉ.तंजीन फातिमा को यहीं रखा जाएगा। मो. आजम खान को सीतापुर और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को हरदोई जेल भेजे जाने का निर्णय हुआ और फिर अलग-अलग गाड़ियों से कड़ी सुरक्षा के बीच इन्हे भेज दिया गया। दोनों सकुशल क्रमशः सीतापुर और हरदोई जेल पहुँच भी गए। कारागार महानिदेशक (डीजी) एस.एन. साबत ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि हां, आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दूसरी जेलों में भेजा गया है। हालांकि रामपुर जेल से सीतापुर जेल के लिए निकलते समय ऐसा पहली बार हुआ जब आजम खान एक अघोषित भय से ग्रस्त दिखे उन्होंने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा भी कि हमारा एनकाउंटर किया जा सकता है।
अमूमन सुरक्षा कारणों के चलते या किसी खुफिया इनपुट के आधार पर प्रशासनिक कारणों के चलते किसी कैदी की जेल बदलने की ऐसी कार्रवाई की जाती है। रविवार को लगभग साढ़े चार बजे तड़के हुई इस कार्रवाई पर सियासी गलियारे में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही है। सियासी जानकारों का मानना है कि ऐसा सियासी कारणों से भी आजकल किया जाता है। जब मो. आजम खान को लेने के लिए पुलिस की गाड़ी आई तो उसे देख बेटे अब्दुल्ला आजम ने पुलिस से कहा कि इस गाड़ी में बब्बा नहीं बैठ पाएंगे। क्योंकि उनकी कमर इस काबिल नहीं है। इस मौके पर आजम खान ने भी अब्दुल्ला को कुछ हिदायतें दीं। आजम और अब्दुल्ला के अनुरोध पर पुलिस ने आजम को बीच की सीट पर न बैठा किनारे की सीट पर बैठाया। अघोषित भय से ग्रस्त आजम ने सीतापुर जेल पहुँचने पर राहत की सांस ली। हालांकि इससे पहले भी एक अन्य आपराधिक मामले में मो. आजम खान दो साल से अधिक समय तक सीतापुर जेल में बिता चुके थे। बाद में सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत के बाद उन्हे मई 2022 में रिहा किया गया था।

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