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UP विधानसभा चुनाव : मायावती का पुराने ब्राह्मण कार्ड पर ही भरोसा, होंगे ब्राह्मण सम्मेलन

By Shakti Prakash Shrivastva on July 18, 2021
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

ब्राह्मण कार्ड के सहारे सत्ता सुख ले चुकी बसपा सुप्रीमों मायावती एक बार फिर इसी कार्ड के सहारे चुनावी वैतरणी पार करना चाहती है। उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में मायावती ने पुराने दलित-ब्राह्मण कार्ड के सहारे ही उतरने का निर्णय कर लिया है। बाकायदे उन्होने इस बाबत रविवार को ऐलान भी कर दिया। मायावती को इस बात का पूरा भरोसा है कि प्रदेश का ब्राह्मण समाज योगी सरकार से नाराज है। ऐसे में इस कार्ड के इस्तेमाल से 2007 के चुनावी परिणाम की पुनरावृत्ति की जा सकती है।

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने यह ऐलान कर एक बड़ा दांव खेला है। इस क्रम में 23 जुलाई से प्रदेश के 18 मंडलों में BSP की तरफ से ब्राह्मण सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इस सम्मेलनों की शुरुआत अयोध्या सेहोगी। BSP के महासचिव सतीश चंद्र मिश्र को इस आयोजन की जिम्मेदारी दी गई है। मायावती ने यह घोषणा करते हुए कहा कि पूरे प्रदेश की जनता मौजूदा सरकार की गलत नीतियों से त्रस्त है। अलग-अलग ढंग से समाज के हर वर्ग के लोगों का शोषण हो रहा है। सर्वाधिक शोषण ब्राह्मण समाज का हो रहा है। यह समाज इन दिनों सरकार के टार्गेट पर है। वो समाज जिसने पिछले चुनाव में बीजेपी के बहकावे में आकर एकतरफा समर्थन देते हुए बहुमत की सरकार बनवाई थी। इस बार ब्राह्मण समाज के लोग अब BJP  के बहकावे में नहीं आएंगे। मुझे पूरी उम्मीद है ब्राह्मण समाज के लोग BSP से जुड़कर एक बार फिर से सर्व समाज की सरकार बनाएंगे। हमारी पार्टी ने हमेशा ब्राह्मण समाज के हितों का ध्यान रखा था और आगे भी रखेगी। पार्टी की यह मंशा ब्राह्मण समाज तक बखूबी पहुंचाने के लिये ही सम्मेलनों के आयोजन का निर्णय लिया गया है। 23 जुलाई को अयोध्या से शुरू होने वाला ब्राह्मण सम्मेलन प्रदेश के सभी मंडलों में आयोजित होगा। इसके बाद प्रदेश के सभी जिलों में भी ब्राह्मण सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। बसपा का ब्राह्मण सम्मेलन 2007 के चुनावी अभियान की तर्ज पर होगा। दलित-ब्राह्मण-ओबीसी के फॉर्मूले के साथ मायावती 2022 चुनाव में उतरेंगी। मायावती ने 2007 में यूपी के चुनाव में 403 में से 206 सीटें जीतकर और 30 फीसदी वोट के साथ सत्ता हासिल करके देश की सियासत में खलबली मचा दी थी। मायावती अपने इसी पुराने फार्मूले के जरिये 2007 की पुनरावृत्ति करने की फिराक में है।

 

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