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विजय किरन आनंद और उनका दुरसंयोग !

By Shakti Prakash Shrivastva on February 6, 2025
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  शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव
यूँ तो विजय किरन आनंद एक सुलझे हुए कुशल आईएएस अधिकारी है। और इसी वजह से उनकी तैनाती अधिकांशतः महत्वपूर्ण पदों पर रही है। लेकिन इन सब के बावजूद कुछ दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि कुछ घटनाओं की वजह से ऐसा लगता है उनके पीछे दुरसंयोग है। अभी मौनी अमावस्या के मौके पर प्रयागराज के संगम तट पर एक बड़ा हादसा हुआ। जिनमे कई श्रद्धालु घायल हुए जबकि कुछ की मौतें भी हुई। शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता वाले इस दिव्य-भव्य आयोजन के प्रबंधन की जिम्मेदारी विजय किरन आनंद के ही पास है। इस हादसे से ही उनके दुरसंयोग की याद आ गई। क्योंकि लगभग नौ साल पहले ऐसा ही एक हादसा वाराणसी में हुआ था। जिसमे लगभग दो दर्जन श्रद्धालुओं की मौत हुई थी और उस समय जिले की कमान विजय किरन आनंद के पास ही थी। मतलब विजय वहाँ जिलाधिकारी थे। हादसे के चलते ही विजय को वहाँ से हटना पड़ा था।
आधुनिकता से ओतप्रोत मौजूदा दौर में भी जब किसी घटना की हूबहू पुनरावृत्ति हो जाती है और घटना में शामिल पात्र एक ही हो तो दुर्भाग्य और दुरसंयोग जैसी चर्चा होने लगती है। जैसे 2016 की बात है। वाराणसी में जयगुरुदेव के शिष्य पंकज महाराज का सत्संग का कार्यक्रम होना था। कार्यक्रम के पहले निकले जुलूस में भगदड़ मच गई। उस समय भी भगदड़ के लिए अनुमान से ज्यादा भीड़ जुटने को कारण माना गया था। भगदड़ की घटना गंगा नदी पर बने पुल पर हुई थी। किसी ने पुल टूटने की अफवाह फैलाई और लोग एक दूसरे को कुचलते हुए भागने लगे थे। इसी में लगभग 25 श्रद्धालुओं की जान चली गई और दो दर्जन के लगभग श्रद्धालु घायल हुए थे। उस समय विजय किरन आनंद ही वाराणसी के जिलाधिकारी थे। भगदड़ के लिए प्रशासनिक अक्षमता को जिम्मेदार मान तत्कालीन जिलाधिकारी आनंद को वहाँ से हटा दिया गया था। कई अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाइयाँ भी हुईं। अब जबकि प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन हादसा हुआ तो इस समय भी विजय किरन आनंद ही महाकुंभ मेला के प्रबंधन के जिम्मेदार मेलाधिकारी है। इस आयोजन में मौनी अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के लिए संगम तट पर पहले पहुंचे हुए श्रद्धालु वही सो रहे थे। ऐसे में अचानक ब्रह्म मुहूर्त से पहले ही श्रद्धालुओ का एक हुजूम सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरिकेटिंग लांघते हुए संगम की ओर आ गया। आध्यात्मिक उन्माद और आस्था की डुबकी के उल्लास में नीचे रेती पर सोये श्रद्धालु उन्हे नहीं दिखे और समूचा हुजूम उन सोये श्रद्धालुओं को रौंदते हुए आगे बढ़ गए। ऐसी स्थिति में मची भगदड़ में लगभग तीस श्रद्धालुओं की मौत हो गई जबकि कई दर्जन घायल है।
उक्त दोनों ही आयोजनों में कुछ चीजे एक जैसी है। जैसे वाराणसी की घटना भी आध्यात्मिक आयोजन में हुआ हादसा था और महाकुंभ में मौनी अमावस्या के दिन हुआ हादसा भी एक धार्मिक आयोजन ही है। उस समय भी दो दर्जन से अधिक मौतें हुई थी इस बार भी लगभग ढाई दर्जन मौते हुई है। उस समय भी जिम्मेदार अधिकारी वही थे जो इस बार हैं। यानि आई ए एस विजय किरन आनंद। 2009 बैच के यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी आनंद ने बागपत में एसडीम पद से अपने कैरियर की शुरुआत की थी। मुख्यमंत्री के शहर गोरखपुर , वाराणसी समेत कई जिलों के जिलाधिकारी रहे आनंद प्रदेश के शिक्षा महानिदेशक रह चुके है। प्रयागराज में माघमेला, अर्ध कुम्भ जैसे आयोजनों को बतौर मेलाधिकारी सकुशल सम्पन्न कराने की वजह से इस बार के महत्वपूर्ण महाकुंभ आयोजन की भी जिम्मेदारी आनंद को दी गई थी।
संगम पर घटी घटना से जहां वाराणसी की घटना की यादें ताजा कर दी वही दोनों ही जगह मुख्य भूमिका में विजय किरन आनंद की तैनाती कहीं न कही यह सोचने को मजबूर करती है कि आखिर विजय जैसे करमठी कुशल अधिकारी के साथ ही ऐसा क्यों। संभव है कि यह महज संयोग हो।

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