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July 22, 2026
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सपा के सचिव और महासचिव में छिड़ी रार

By Shakti Prakash Shrivastva on February 9, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

पूरा उत्तर प्रदेश जान रहा है की प्रदेश में विपक्ष के नाम पर यदि कोई पार्टी मजबूती के साथ बीजेपी के सामने खड़ी है तो वो है समाजवादी पार्टी। वोट प्रतिशत की बात करें तो पिछले विधानसभा चुनाव के मुक़ाबले बीते विधानसभा चुनाव में पार्टी के वोट प्रतिशत में इजाफा हुआ है। परिणाम के लिहाज से भी पार्टी का उपचुनाव में बेहतर प्रदर्शन रहा। पिछले दिनों हुए एक लोकसभा और दो विधानसभा के उपचुनावों में पार्टी को एक लोकसभा मैनपुरी और एक विधानसभा खतौली में जीत मिली। पार्टी की इसी सियासी ताकत को देखते हुए कद्दावर नेता जो बीजेपी में असहज महसूस करते हैं उन्हे सपा में ही भविष्य नजर आ रहा है। स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान सरीखे कई ऐसे नाम है। मैनपुरी में सपा सुप्रीमो की पत्नी डिम्पल यादव के रूप में मिली जीत से पार्टी के कार्यकर्ताओं की आक्रामकता में खासा परिवर्तन आया है। उनका जोश और प्रतिबद्धता देखने लायक है। लेकिन इस मुकाम पर आने के बाद पार्टी संगठन के अंदर खासकर वरिष्ठों के बीच छिड़ी रार पार्टी के भविष्य के लिए शुभ नही है। रामचरित मानस के मामले में पार्टी महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान का विरोध पहले पार्टी की प्रवक्ता डॉ रोली तिवारी मिश्रा ने किए। अब विरोध का दायरा भी बढ़ रहा है। अभी हालिया नियुक्त सचिव पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी ने भी फ्रंट खोल दिया है। उन्होने सीधे अपने ही पार्टी के महासचिव श्री मौर्य की आलोचना करते हुए उन्हे नसीहत दे डाली। उन्होने कहा कि स्वामी प्रसाद को पहले रामचरित मानस को समझना होगा। स्वामी प्रसाद के बयान को श्री तिवारी जिस नजरिए से देखते है उस हिसाब से या तो श्री मौर्य को मतिभ्रम हैं या वो सस्ती लोकप्रियता के लिए ऐसा कह रहे हैं। श्री तिवारी ने कहा कि अगर उन्हे अपने समाज या पिछड़ों को इतनी ही चिंता थी तो कुछ समय पहले तक वो भारतीय जनता पार्टी में मंत्री थे तब ये चौपाई उन्हे भूल गयी थी शायद। अब जब वो समाजवादी पार्टी में है और कुछ नहीं तो सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए समाज में लोगों में भेद करने के लिए ये बात कह दी। श्री तिवारी ने श्री मौर्य को नसीहत देते हुए कहा कि हर सनातन धर्मी प्रभु श्रीराम में आस्था रखता है, गोस्वामी तुलसीदास में आस्था रखता है। उन्हे एक बार पुनः शांत दिमाग से रामचरित मानस का अध्ययन करना चाहिए फिर कोई बात कहनी चाहिए। मूलरूप से तुलसी बाबा ने क्या कहा है इसके बारे में उनको जानकारी होनी चाहिए। राजनीतिक लाभ के लिए और सत्ता के लोलुपता के लिए कोई चीज कही जाए वो उचित नहीं है। जिस तरह से पहले पार्टी की प्रवक्ता डॉ रोली और अब राष्ट्रीय सचिव श्री तिवारी का विरोध श्री मौर्य के बयान पर आया है। वो कहीं न कहीं इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर अभी भी बहुत ठीक नहीं है। अखिलेश यादव को जल्द ही इस बाबत कुछ करना होगा।

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