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प्रियंका का ‘दुर्गा स्तुति पाठ’ : कांग्रेस की छवि बदलने की रणनीति का हिस्सा …

By Shakti Prakash Shrivastva on October 11, 2021
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी ने वाराणसी की रैली में अपने सम्बोधन की शुरुआत दुर्गा स्तुति से की। नवरात्रि के चौथे दिन आयोजित रैली में प्रियंका ने न केवल दुर्गा स्तुति पाठ किया बल्कि उपस्थित कांग्रेसियों से जय माता दी का जयकारा भी लगवाया। यह बताना भी नहीं भूलीं कि उनके व्रत का चौथा दिन है। यानि वो नवरात्रि व्रत भी कर रही है। कुल मिलाकर ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस अब अपनी छवि बदलने की कोशिश में लग गयी है। ऐसा लगता है कि कांग्रेस को ऐसा ख्याल बंगाल चुनाव परिणाम के बाद से आया। क्योंकि जिस तरह पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान ममता बनर्जी ने माता चंडी का पाठ कर बहुसंख्यकों में अपनी स्वीकार्यता बढाई थी उसी तर्ज पर प्रियंका ने भी ये प्रयास किया है। राहुल गांधी भी सितंबर माह में माता वैष्णो देवी के दरबार में मत्था टेकने गए थे। इतना ही नहीं कांग्रेस के दूसरे महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कश्मीरी पंडितों और सिक्खों के समर्थन में आवाज़ बुलंद कर इसी तरह का एक संदेश दिया था। ऐसा लग रहा है कि यह सब यूपी विधानसभा चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस पार्टी की सोची-समझी बदली रणनीति के तहत उदार हिन्दुत्ववादी छवि बनाने की कवायद का हिस्सा है।

देश में बीजेपी के एतिहासिक उभार से दबाव में आई कांग्रेस पार्टी इस तरह के प्रयोगों के जरिये बेहतर प्रणाम मिलने के प्रति आशान्वित है। राजनीति के जानकारों की मुताबिक कांग्रेस के पूर्ववर्ती नेता खासकर इंदिरा गांधी ने 1971 में बांग्लादेश की आजादी में अहम भूमिका अदा कर उग्र राष्ट्रवाद का एक संदेश दिया था। साथ ही वो नियमित रूप से मंदिरों में जाकर हिंदू प्रतीकों को लेकर भी कांग्रेस पर हमले की गुंजाइश को काफी कम कर देती थीं। बाद के दिनों में इस छवि में लगातार गिरावट आती चली गयी। खासकर तबसे जब प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने शाहबानो प्रकरण पर कानून पास किया। इस प्रकरण से संघ परिवार देश के आमजन को काफी हद तक यह समझाने में कामयाब हो गया कि कांग्रेस मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करने वाली पार्टी है। पार्टी की मौजूदा स्थिति से हुए ऐसे नुकसान का आकलन किया जा सकता है। कुछ राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस तरह से हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल मुसलमानों को कांग्रेस से दूर कर देगा। राजनीति के जानकारों का यह भी मानना है कि शाहबानो प्रकरण को जिस तरह से तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने हैंडिल किया, उससे कांग्रेस पर ये आरोप लगते रहे हैं कि वह हिंदू अस्मिता और हिंदू हितों से ज्यादा मुस्लिम अस्मिता और मुस्लिम हितों को तरजीह देती है। सोनिया गांधी के समय में ये आरोप और प्रबल हुए। हालांकि, इंदिरा गांधी समय-समय पर मंदिरों में जाती रहती थीं। इसलिए उन पर मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप उतनी तीव्रता के साथ नहीं लगे। उत्तर भारत में जातीय और धार्मिक अस्मिता की भावना पिछले कई चुनावों में बलवती रही है। प्रियंका का चुनावी रैली में दुर्गा स्तुति इसी रणनीति का हिस्सा है।

 

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