मुंबई, (ब्यूरो)। मुंबई के झुग्गी-झोपड़ी वाले सबसे बड़े इलाके धारावी में अप्रैल माह में जब एक दिन में 99 कोरोना केस मिले तो बीएमसी के अधिकारियों को कोरोना के पहली लहर वाले धारावी माडल की याद आई। फिर चार टी- ट्रेसिंग, ट्रैकिंग,टेस्टिंग और ट्रीटिंग वाले इस फार्मूला का इस्तेमाल किया गया और चंद दिनों में ही परिणाम मिला। अब रोजाना पाँच- सात मरीज आ रहे हैं। आज इलाज करा रहे मरीजों की संख्या घटकर 50 हो गई है। अधिकारियों ने कहा कि कोविड-19 प्रबंधन में धारावी मॉडल और टीकाकरण अभियान ने इलाके में दूसरी लहर को सफलतापूर्व रोकने में मदद की है। कोरोना काल में एक समय देश में सर्वाधिक चर्चित इलाकों में शामिल था धारावी। यह इलाका ढाई वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यहाँ बुधवार को तीन और बृहस्पतिवार को चार कोरोना के मामले आए थे जबकि मुंबई में अब भी कोरोना वायरस संक्रमण के मामले एक दिन में हजारों मामले सामने आ रहे हैं। ऐसा धारावी माडल के प्रयोग से हुआ।
ट्रेसिंग-ट्रेकिंग-टेस्टिंग और ट्रीटिंग आधार है धारावी फार्मूले का
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अधिकारियों की मुताबिक धारावी में इलाज करवा रहे मरीजों की संख्या अब महज 50 रह गई है । कोविड-19 के कुल 6,802 मामलों में से 6,398 लोग स्वस्थ हो चुके हैं जबकि 354 लोगों की मौत हो गई है। यह बगल के दादर और माहिम इलाकों के ठीक उलट हैं जहां क्रमश: 204 और 254 लोगों का अब भी इलाज चल रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, धारावी में दूसरी लहर में कोरोना का प्रभाव अप्रैल में चरम पर पहुंच गया था। आठ अप्रैल को यहां एक दिन में सर्वाधिक 99 मामले सामने आए थे। रोजाना के मामलों में इस तेज वृद्धि ने नगरपालिका के अधिकारियों को एक बार फिर “धारावी मॉडल” का रुख करने पर मजबूर किया जिसमें चार टी- ट्रेसिंग, ट्रैकिंग,टेस्टिंग और ट्रीटिंग शामिल थे। इसका परिणाम मिला। मामलों पर प्रभावी अंकुश सामी रहते लग गया। आज धारावी की स्थिति नियंत्रण में है। कोविड-19 की पहली लहर के दौरान इस रणनीति की विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी प्रशंसा की थी।