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मिशन 2024 : ‘हिन्दुत्व’ के रूप में अखिलेश को मिला जीत का नुस्खा

By Shakti Prakash Shrivastva on July 29, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को आखिरकार लोकसभा चुनाव में पार्टी को विजेता बनाने का नुस्खा मिल गया है। अखिलेश यादव गुरुवार को काशी में थे। वही बाबा भोलेनाथ की कृपा से उन्हे यह दिव्य ज्ञान हासिल हुआ। यही उन्हे लगा कि अगर प्रदेश में पार्टी की चुनावी नैया पार लगानी है तो उन्हे हिन्दुत्व की सवारी करनी ही होगी। लिहाजा जौनपुर जाने से पूर्व अखिलेश ने जिस तरह से ललाट पर चंदन का लेप लगा हिन्दुत्व की भाषा बोलते हुए बीजेपी को सीधा निशाने पर रखा, उससे तो यही लगता है कि अब उनको शिवपाल-आजम-ओमप्रकाश राजभर के व्यवहार से यथार्थ का एहसास होने लगा है। आजम के तंज, चाचा शिवपाल की भावनात्मक बेधी बाण और ओमप्रकाश राजभर के आरोपों ने आखिरकार अखिलेश को हिन्दुत्व के राजनीतिक महत्व का बेहतर अनुभव करा दिया है। विपरीत परिस्थितियों के बीच चुनावी तैयारी में लगे अखिलेश यादव का अंदाज वाकई काशी में इस बार काफी बदला हुआ लगा। काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद अखिलेश ने प्रेसवार्ता की। प्रेस से मुखातिब अखिलेश ने अपने प्रतिद्वंदी बीजेपी को जब हिन्दुत्व के मुद्दे पर घेरना शुरू किया तो मौजूद मीडिया को भी एकबारगी आश्चर्य हुआ। प्रेस से मुखातिब अखिलेश ने कहा कि मुझे बीजेपी से धर्म की परिभाषा नही सीखनी है। ये विरोधियों में फूट डालो और राज करो के पक्षधर हैं। उन्हों कहा कि धर्म की बात करने वाली बीजेपी ने दूध-दही और मक्खन तक पर जीएसटी लगा दी है। आजादी के बाद से देश की ये पहली सरकार है जिसने इस तरह टैक्स लगाए है। सावन में भगवान शिव को चढ़ाए जाने वाले दूध पर भी जीएसटी लगा कर पूजा करने वालों को भी नहीं बख्शा गया। काशी और जौनपुर में अखिलेश ने धर्म के मुद्दे पर बीजेपी को निशाने पर रखने का कोई भी अवसर नही छोड़ा। काँवड़ियों पर दिए गए ओवैसी के बयान पर भी अखिलेश ने कहा कि यह धर्म का मुद्दा है। इस पर बहस नही होनी कहिए। धर्म में तर्क की गुंजाइश नही होती। अखिलेश के इस तरह धर्म से लबरेज बयानों को देख ऐसा लग रहा है कि 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए धर्मयुद्ध का एक अलग मैदान तैयार किया जा रहा है। अखिलेश ने कहा कि बीजेपी हिंदूवादी है तो फिर दूध पर टैक्स क्यों। भगवान भोलेनाथ को चढ़ाए जाने वाले दूध पर जीएसटी क्यों। उनके इस तरह के धार्मिक तेवर से ऐसा लगता है कि वो उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग राजनीतिक छवि गढ़ना चाहते हैं। क्योंकि उन्हे इस बात का एहसास हो गया है कि चुनाव से पहले भव्य राम मंदिर का निर्माण और ज्ञानवापी और मथुरा का घिसटता विवाद बीजेपी को राजनीतिक खुराक देती रहेगी। इसलिए बेहतर है कि क्यों न उनके पराजय के लिए कुछ धर्म के राह से ही काट ढूँढी जाए।

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