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July 21, 2024
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रायबरेली में अदिति के मौन का अर्थ!

By Shakti Prakash Shrivastva on May 21, 2024
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                                                                                                       शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीट कई दशकों से देश की अति महत्वपूर्ण सीट बनी हुई है। इस बार भी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के चुनाव लड़ने की वजह से यह सीट सुर्खियों में बनी हुई है। हालांकि यहाँ के प्रत्याशियों का भाग्य इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन यानि इवीएम में कैद हो गयी है। लेकिन पूरे चुनाव प्रचार अभियान में स्थानीय विधायक अदिति सिंह जो पहले कांग्रेस में थी लेकिन इस समय वो बीजेपी की विधायक है की चुप्पी सियासी जानकारों तक की समझ से परे रहा। पांचवें चरण में यानि 20 मई को यहाँ मतदान कार्य सम्पन्न हो चुका है। इस सीट से लगातार सोनिया गांधी चुनाव जीतती रही है इसके पहले इंदिरा गांधी भी यहाँ से सांसद चुनी जाती रही है। ऐसे में जब पिछले साल सोनिया गांधी ने चुनाव लड़ने से विरक्ति दिखाई तो यह माना जाने लगा की यहाँ से उनके अनुपस्थिति में उनकी बेटी प्रियंका गांधी चुनाव लड़ेंगी। क्योंकि सोनिया गांधी के पिछले कुछ चुनावों में उनका पूरा का पूरा चुनावी प्रबंधन प्रियंका गांधी ही देखती रही हैं। क्षेत्र के आम और खास दोनों मे ही उनका दखल है। लेकिन ऐन मौके पर कांग्रेस ने यहाँ से उनकी जगह राहुल गांधी को चुनाव मैदान में उतार दिया। उनके खिलाफ बीजेपी से विधान परिषद सदस्य और सरकार में राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह मैदान में है। इस लोकसभा क्षेत्र में आने वाले ऊंचाहार विधानसभा से सपा के कद्दावर नेता और विधायक मनोज पांडेय ने सपा छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया है। जबकि पूरे चुनाव प्रचार के दौरान चुप्पी साधे रही सदर बीजेपी विधायक अदिति सिंह ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ ही दी।

मीडिया के साथ हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि चुनाव में कैंडिडेट का चयन पार्टी की पार्लियामेंट्री बोर्ड का फैसला होता है। टिकट देने का पार्टी का फैसला स्वीकार्य है। मैं पूरी तरह से बीजेपी के साथ हूं और वैसे भी यह चुनाव प्रधानमंत्री के चयन का हो रहा है। मोदीजी तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं और यह सबसे जरूरी बात है।’ राहुल गांधी की तरफ से चुनाव में पांच लाख के अंतर से जीत के दावे पर अदिति ने कहा, ‘यह केवल उनका चुनावी नारा ही है।

2017 में पहली बार कांग्रेस के टिकट पर चुनकर आईं अदिति सिंह 2019 के लोकसभा में सोनिया गांधी के लिए प्रचार कर रही थीं। लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव के पहले वह भाजपा में शामिल होकर चुनाव में जीतकर दोबारा विधायक बन गईं। वह यहां से लोकसभा टिकट पाने के लिए भी जोर लगा रही थीं लेकिन भाजपा आलाकमान ने दिनेश पर भरोसा जताया। स्थानीय राजनीति में दिनेश सिंह और अदिति सिंह के परिवार में अदावत मानी जाती है। लोकसभा चुनाव में प्रचार अभियान में ज्यादा सक्रिय नजर नहीं आ रहीं अदिति सिंह ने हाल ही में सोशल मीडिया में अपने पिता के साथ एक फोटो डालते हुए लिखा था कि “उसूलों के साथ कोई समझौता नहीं”। इसके भी सियासी मानये निकाले जा रहे थे।

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