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मुरझा गयी सुर लताओं की ‘लता’

By on February 6, 2022 0 622 Views

शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

पिछले लगभग आठ दशकों से देश में जब कभी भी स्वर संदर्भों में विभूतियों के बारे में चर्चा होती रही तो उसमें सबसे ऊपर नाम सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर का ही आता रहा है। वही लता जिसके गले में आठ दशकों तक सोलह वर्षीय समृद्ध गायिका के गले की मधुर स्वर लहरियाँ मौजूद रहीं। कहा जाता रहा की उनके गले में साक्षात सरस्वती का वास है। लेकिन आज यानि रविवार की सुबह 8 बजकर 12 मिनट पर उसी सुमधुर आवाज की मल्लिका स्वर सम्राज्ञी भारत कोकिला जैसे अनेकानेक नामों से विभूषित भारत रत्न लता मंगेशकर की आवाज सदा-सदा के लिए शांत हो गयी। 92 वर्ष की अवस्था में पिछले एक महीने से लताजी निमोनिया और कोरोना के संक्रमण से जूझ रही थीं। बहन उषा मंगेशकर की मुताबिक उन्हे इलाज के लिए 8 जनवरी को मुंबई के प्रसिद्ध ब्रीच कैंडी हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। ठीक एक महीने बाद रविवार को मल्टी आर्गन फेल्योर के चलते उनका निधन हो गया। सरकार ने उनके निधन पर दो दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। देश में इस दौरान सम्मान के रूप में राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे। इनके निधन पर देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्रियों, फिल्म जगत के कलाकारों सहित देशभर के उनके शुभचिंतकों ने अपूरणीय क्षति बताते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। भारतीय क्रिकेट टीम ने वेस्ट इंडीज के साथ होने वाले मैच में श्रद्धांजलि स्वरूप काली पट्टी बांध कर खेलने का निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी ने आज जारी होने वाले पार्टी के संकल्प पत्र का लोकार्पण कार्यक्रम भी स्थगित कर दिया है। लताजी ने अपने कैरियर का पहला गाना 1942 में फिल्म ‘महल’ के लिए गया था। गाने के बोल ‘आने वाला आएगा’ से उन्हे एक अलग पहचान मिली। लता जी ने अपने पूरे गायिकी के कैरियर में 30,000 से ज्यादा गानों को अपनी आवाज दी। अपनी विशिष्ट गायिकी के चलते देश-दुनिया में प्रसिद्धि पाने वाली लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को मध्यप्रदेश के इंदौर में हुआ था। 13 साल की छोटी सी उम्र में उन्होंने गाना शुरू कर दिया था। लता जी के पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर संगीत और मराठी रंगमंच के जाने-माने व्यक्ति थे। पिता से ही लताजी को संगीत की शिक्षा मिली थी। लता जी के पिता ने अपने गांव मंगेशी के नाम पर अपना उपनाम मंगेशकर रखा था। लता जी की मां का नाम श्रीमती माई था। बचपन में लता जी का नाम हेमा रखा गया था बाद में थिएटर कलाकार लतिका के नाम पर उनका नाम लता रख दिया गया। लता मंगेशकर अपने पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं। उनके बाद उनकी तीन बहनें मीना मंगेशकर, आशा भोंसले, उषा मंगेशकर और भाई हृदयनाथ मंगेशकर हैं। उनके सभी भाई- बहनों की आजीविका का आधार संगीत ही था। साल 1982 में लता जी के पिता के निधन के बाद घर की जिम्मेदारी उन पर आ गई थी। ऐसे में 13 साल की छोटी सी उम्र में ही पैसों की तंगी दूर करने के लिए लता मंगेशकर ने कुछ हिंदी और मराठी फिल्मों में काम करना शुरू किया था। परिवार की जिम्मेदारियों की वजह से लता मंगेशकर ने कभी शादी नहीं की। जबकि छोटी बहन आशा भोंसले ने 16 साल की उम्र में ही परिवार के विरुद्ध गायक संगीतकार आर डी बर्मन से शादी कर ली उनसे उनके तीन बच्चे भी हैं। वहीं लता जी की तीसरी बहन मीना मंगेशकर ने भी हिंदी और मराठी फिल्मों में पार्श्वगायन किया है। उषा मंगेशकर ने भी बड़ी बहन यानि लताजी की तरह शादी नहीं की। लता जी  के भाई हृदयनाथ मंगेशकर शास्त्रीय संगीत के एक मंजे कलाकार थे। कम लोग ही जानते हैं कि लताजी गायिका होने के साथ-साथ एक संगीतकार भी थीं। उनका अपना एक फिल्म प्रोडक्शन भी था, जिसके बैनर तले फिल्म ‘लेकिन’ बनी थी। इस फिल्म के लिए लता जी को सर्वश्रेष्ठ गायिका का नेशनल अवार्ड भी मिला था। 61 साल की उम्र में नेशनल अवार्ड जीतने वालीं लता जी एकमात्र गायिका रहीं। इसके अलावा भी फिल्म ‘लेकिन’ ने पांच और नेशनल अवार्ड हासिल किए थे। साल 2001 में लता मंगेशकर को संगीत की दुनिया में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें पद्म विभूषण, पद्म भूषण और दादासाहेब फाल्के अवार्ड जैसे प्रतिष्ठित सम्मान भी मिल चुके हैं।

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