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डबल इनकम बना जंजाल !

By Shakti Prakash Shrivastva on December 18, 2025
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डबल इनकम बना जंजाल !

शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

बिहार की सियासत में इन दिनों एक अलग किस्म का भूचाल आया हुआ है। यहाँ के कुछ विधायकों और पूर्व विधायकों द्वारा वेतन और पेंशन का एक साथ भुगतान लेने का मामला तूल पकड़ा हुआ है। राइट टू इन्फार्मेशन की वजह से यह मामला उजागर हुआ है जिसमें बिहार के आठ बड़े नेताओं ने उस दौरान भी पूर्व विधायकों वाली पेंशन राशि लिया है जब वो सांसद या विधायक थे। जबकि नियमावली की मुताबिक सार्वजनिक पद पर रहते हुए सिर्फ वेतन लिया जा सकता है पेंशन नहीं। ऐसे में यह मामला खूब गरमाया हुआ है।

चूंकि इस तरह एक साथ डबल इनकम करने वाले नेताओं में बीजेपी, जेडीयू और आरजेडी समेत सभी दलों के नेता शामिल हैं। सत्ताधारी दल के नेताओं के शामिल होने के नाते मामला थोड़ा पेचीदा हो गया है। इन नेताओं में सतीश चंद्र दूबे, विजेंद्र प्रसाद यादव, उपेंद्र कुशवाहा, देवेश चंद्र ठाकुर, ललन कुमार सर्राफ, संजय सिंह, नीतीश मिश्रा और भोला यादव जैसे नाम हैं।  सियासी गलियारे में सुर्खियां बटोर रहे इस मामले में शामिल कुछ नेताओं ने अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन भी करना शुरू कर दिया है।

सूची में बीजेपी राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र दूबे, वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा, जेडीयू राज्यसभा सांसद देवेश चंद्र ठाकुर, बीजेपी नेता ललन कुमार सर्राफ, पूर्व मंत्री संजय सिंह, पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा और आरजेडी नेता भोला यादव शामिल है। हालांकि भोला चुनाव हार चुके हैं।

इनमें राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने सबसे पहले सोशल मीडिया पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि जब मैं सांसद या विधायक नहीं था, सिर्फ उसी दौरान पेंशन ली है। सदन का सदस्य रहते सिर्फ वेतन लिया, पेंशन बंद करा दी थी। पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा ने भी विभाग को पत्र लिखकर बताया कि उनके खाते में सिर्फ 22 सितंबर 2015 से 8 नवंबर 2015 तक का ₹67,367 पेंशन आया, जब वो किसी पद पर नहीं थे। उसके बाद पेंशन बंद है। इनके अलावा किसी अन्य नेताओं ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। हालांकि इस मामले में जेडीयू सांसद रामप्रीत मंडल ने कहा है कि पद पर रहते हुए पेंशन नहीं लेना चाहिए। उपेंद्र कुशवाहा ने साफ कर दिया है पद पर रहते हुए उन्होंने पेंशन नहीं लिया है. मेरा भी यही मानना है अगर पद पर नहीं हैं तो बुढ़ापे में पेंशन मिलना चाहिए।

जबकि बिहार विधानसभा के नियम इस बात की स्पष्ट तसदीक करते हैं कि कोई भी व्यक्ति अगर मंत्री, सांसद या विधायक है तो उसे सिर्फ वेतन मिलेगा और पूर्व विधायक पेंशन नहीं ले सकता। पेंशन सिर्फ उस समय मिलती है जब व्यक्ति किसी निर्वाचित पद पर नहीं होता है। विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में और कह रहा है कि सरकार अपने ही लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है।

विधानसभा सचिवालय से मिल रही जानकारी की मुताबिक आर टी आई में जो जानकारी दी गई है, उसकी जांच की जा रही है।  अगर कोई नेता गलत तरीके से पेंशन लेता पाया गया तो राशि वापस ली जाएगी। विपक्ष इसे सरकार की नैतिकता से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, जबकि सरकार कह रही है कि तथ्य सामने आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में मामला अब सिर्फ पेंशन या वेतन का नहीं, बल्कि राजनीतिक जिम्मेदारी और कानून के पालन का बन चुका है।

 

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