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रूठा मानसून : गोरखपुर मण्डल में सूख गए खेत, कैसे होगी किसानों की आय दोगुनी

By Shakti Prakash Shrivastva on July 20, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

मानसून की नाराजगी के चलते गोरखपुर मण्डल में सूखे के आसार बन गए हैं। धान की रोपाई के बाद खेत सूख गए है। गोरखपुर और कुशीनगर में हालात अपेक्षाकृत ज्यादा गंभीर है। मण्डल में औसत से लगभग अस्सी फीसद कम बारिश हुई है। किसानों की आय दोगुनी करने संबंधी सरकार के दावे किसानों को मुंह चिढ़ा रहे है। किसान इन दिनों अपने सूखते खेतों को बचाने के लिए जद्दो-जहद कर रहा है। इलाके के नहर-तालाब सभी के सूखने के चलते लगभग पंद्रह फीसद किसान ही ऐसे है जो पंपिंग सेट के जरिए खेतों में पानी का इंतजाम कर पा रहे हैं। हालांकि इससे उनकी खेती की लागत अच्छी खासी बढ़ गई है। कुशीनगर के किसान ओ पी श्रीवास्तव की मुताबिक प्रति एकड़ लगभग ढाई से तीन हजार रुपये का खर्च पानी में आ रहा है। पिछले 18  दिनो से इलाके में बारिश नही हुई है। इधर हाल के वर्षों में पहली बार ये देखने में आ रहा है कि मौसम विभाग की बारिश संबंधी भविष्यवाणियाँ भी गलत साबित हो रही है। वरना कमोबेश उनकी घोषणाएं सही साबित हो रही थी। मौसम के जानकारों की मुताबिक गोरखपुर शहर में जुलाई महीने में अब तक 216 मिलीमीटर की अपेक्षित बारिश की बजाय महज 12 मिलीमीटर बारिश हुई है। यह सामान्य से लगभग 95 फीसद कम है। यह हालत चिंताजनक है। गांवों में नाराज मानसून को मनाने के लिए ग्रामीण तरह-तरह की पूजा-पाठ कर रहे है। कहीं मेढक-मेढकी की शादी रचाई जा रही है तो कहीं जनप्रतिनिधियों को गोबर-मिट्टी से नहलाने का टोटका किया जा रहा है। लेकिन अभी तक परिणाम शून्य है जो गंभीर सूखे की तस्वीर दिखा रहा है। खेतों में धान की रोपाई कर आसमान की तरफ टकटकी लगाए किसान ऊपरवाले से मदद की गुहार लगा रहा है। सच्चाई ये है कि यदि ये हालात कुछ दिन और यूं ही रह गए तो औसत मध्यमवर्गीय किसान मुंह के निवाले के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हो जाएगा। हालांकि मौसम विभाग ने एक बार फिर इस इलाके में बुधवार से लगभग पाँच दिनों तक कहीं कम तो कहीं ज्यादा बारिश की उम्मीद जताया है। विभाग की मुताबिक मध्य प्रदेश में चक्रवाती सिस्टम सक्रिय हुआ है और जम्मू कश्मीर से उठा पश्चिमी विक्षोभ भी पूर्वी उत्तर प्रदेश के इसी भू भाग से होता हुआ तिब्बत की ओर जाने वाला है। मरता क्या न करता वाली स्थिति में किसान एक बार फिर मौसम विभाग की भविष्यवाणी पर भरोसा कर बुधवार का परिणाम देखना चाहता है। इस क्रम में आज बुधवार की सुबह इलाके में बारिश की फुहार पड़ी। ऐसा लगा कि मौसम विभाग की भविष्यवाणी की साख बचाने के लिए ऊपरवाले ने ऐसा किया। जबकि किसानों सहित आम आदमी को उमस भारी गर्मी से निजात पाने के लिए अच्छी बारिश की दरकार है न कि बारिश की फुहार की। फिर भी मौसम के बदलते मिजाज से कुछ उम्मीदें जगी है। किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या ये है कि बगैर मानसूनी बारिश के उनकी फसल को बचा पाना बहुत मुश्किल है। इसलिए उन्हे उम्मीद करना उनकी नियति भी है और मजबूरी भी।

 


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