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February 16, 2026
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मोदी सरकार पर आफत !

By Shakti Prakash Shrivastva on December 26, 2024
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                                                                                         शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

बैसाखी के सहारे ही सही तीसरी बार केंद्र की सत्ता में काबिज राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठहबंधन की सरकार अभी जुम्मा-जुम्मा साल भर भी नहीं पूरा कर सकी कि ऐसा क्या हो गया कि उस पर आफत के बादल मंडराने लगे हैं। इसे समझने के लिए हालिया सियासी घटनाक्रमों को बारीकी से समझना होगा। संसद में वक्फ बिल पर थोड़ा सा हिचकोला खाने के बाद एनडीए के घटक दल फिर से सामान्य हो ही रहे थे कि गृहमंत्री अमित शाह द्वारा दिए गए एक बयान ने समूचे एनडीए को हिलाकर रख दिया। जिसमे संविधान पर राज्यसभा में चल रही एक चर्चा पर बोलते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता।

समूचा विपक्ष एक सुर से गृहमंत्री के इस्तीफे की मांग के साथ-साथ सरकार के दलित विरोधी चेहरा उजागर होने का दावा करने लगा। कुछ सहयोगी दलों की बेरुखी से पैदा हुए हालात इस बात के संकेत देने लगे कि सरकार पर संकट आ गया है।

बीते लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद सरकार बनाने के लिए आवश्यक संखया जुटाने के लिए इस बार बीजेपी को जिन दो प्रमुख सियासी दलों का सहारा लेना पड़ा है। उनमे एक चंद्र बाबू नायडू की तेलुगुदेशम पार्टी है और दूसरी नितीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड यानि जेडीयू पार्टी है। इनमें नितीश कुमार जिस प्रदेश यानि बिहार के मुख्यमंत्री है वहाँ की सियासत दलित और मुस्लिम मतदाताओं से ज्यादा प्रभावित है।  सीधे शब्दों में यह कह सकते है कि यहाँ मुस्लिम मतदाताओं के साथ-साथ  लगभग 21 फीसद की प्रभावी भागीदारी रखने वाले दलितों का अहम योगदान है। ऐसे में नायडू एक बार अमित शाह के बयान से उपजे हालात से ज्यादा प्रभावित न हो लेकिन नितीश कुमार की समूची सियासत ही इसी पर आधारित है। लिहाजा उनके लिए इसे आसानी से इग्नोर करना असंभव है। क्योंकि बिहार की समूची राजनीती ही दलित, मुस्लिम और पिछड़ों के इर्द-गिर्द ही चलती है। जब शाह के बयान पर एनडीए के सहयोगी बिहार के पशुपति पारस ने आंखे तरेरते हुए एक तरह से साथ छोड़ा तो सरकार के लिए स्थितियाँ असहज होने लगी। मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने अपनी प्रगति यात्रा को बीच में स्थगित कर अंबेडकर और बुद्ध की पूजा करने वाली तस्वीर साझा कर विरोध का जो संकेत दिया है उसने भी सरकार के अलंबरदारों की नींद उड़ा दी है। हालांकि चिराग पासवान और जीतन मांझी सरीखे नेताओं ने गठबंधन की मजबूती जताने की कोशिश कर मोदी-शाह का मनोबल बढ़ाने का असफल प्रयास जरूर किया है। इस बीच चिंतित बीजेपी ने एनडीए गठबंधन के सभी दलों की एक बैठक बुधवार को बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड़ड़ा के आवास पर आहूत की। मुद्दा था अंबेडकर पर दिए गए गृहमंत्री अमित शाह के बयान से उपजे स्थिति का वास्तविक आकलन करना और गंभीरता की स्थिति में उससे निबटने का रास्ता ढूँढना। हालांकि आधिकारिक तौर ऐसा नहीं बताया गया। आधिकारिक तौर पर इसे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी पर आहूत अनौपचारिक बैठक बताया गया। इसमें संकट खड़ा करने में समर्थ नेताओं में से एक चंद्रबाबू नायडू समेत अन्य नेता तो पहुंचे लेकिन अहम नेता बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार नहीं पहुंचे। नितीश की अनुपस्थिति से ही इस कयासबाजी को आधार मिला कि एनडीए के भीतरखाने सब ठीक नहीं है। सरकार को भी खतरे का अंदेशा है। बिहार में हाल ही में पुलिस प्रमुख और राज्यपाल के बदलाव को भी इसी चश्मे से देखा जा रहा है।

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