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ताड़ना का शिकार हुआ तारणहार !

By Shakti Prakash Shrivastva on May 13, 2024
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

मान्यवर कांशीराम के दलित उत्थान संबंधी सपनों को हकीकत में बदलने जैसी अहम जिम्मेदारी उनके बाद बहन मायावती ने ली थी। मायावती ने अपने गुरु के संकल्प को बखूबी अंजाम तक पहुंचाने का हर संभव प्रयास भी किया। इस दौरान कई बार उन्हे उत्तर प्रदेश जैसे अहम सूबे का मुख्यमंत्री बनने का अवसर भी मिला। मायावती के सभी कार्यकाल प्रदेश मे अच्छे कानून व्यवस्था के लिए आज भी याद किये जाते हैं। कानून का राज स्थापित करने में उन्होंने किसी से भी समझौता नहीं किया। उन्होंने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में जहां कुंडा के बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह पर नकेल कसा वहीं अपनी ही पार्टी के बाहुबली सांसद रमाकांत यादव को अपने आवास पर पुलिस बुलाकर गिरफ्तार भी कराया। हालांकि इधर लगभग एक दशक से भी अधिक समय से मायावती और उनकी पार्टी सत्ता में नहीं है लेकिन उनका वो तेवर आज भी पूर्ववत बरकरार है। उनके इस तेवर के हालिया शिकार उनके अपने उत्तराधिकारी को ही होना पड़ा है। हुआ ये कि पिछले साल दिसंबर माह में मायावती ने अपनी बढ़ती उम्र को देखते हुए अपने भतीजे आकाश आनंद को न केवल का पार्टी का नेशनल कोआर्डिनेटर बनाया बल्कि उन्हे अपना उत्तराधिकारी भी घोषित कर दिया। अलबत्ता इसके लिए उन्होंने कुछ शर्तें भी लगाईं। लेकिन किन्ही मुद्दों के चलते अपने इसी भतीजे को मायावती ने पिछले दिनों न सिर्फ नेशनल कोआर्डिनेटर पद से हटाया बल्कि उत्तराधिकारी की जिम्मेदारी से भी मुक्ति दे दी।

इन दिनों जब उत्तर प्रदेश में हर सियासी पार्टियां लोकसभा चुनाव प्रचार में अपना सर्वस्व लगाए हुई हैं। बीएसपी भला पीछे क्यों रहती। उसके भी नेता प्रचार में लगे हुए हैं। इस दौरान सीतापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए आकाश आनंद ने बीजेपी नेताओं की तुलना आतंकवादियों से कर दी। साथ ही, उन्हें जूतों से मारने की बात कही। आकाश आनंद के इस भड़काऊ भाषण के बाद उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ जिसमें पार्टी के तीन प्रत्याशियों को भी नामजद किया गया। बीएसपी सुप्रीमो मायावती को आकाश का यह व्यवहार नागवार लगा उन्होंने इसे बेहद गंभीरता से लेते हुए उनकी रैलियों के आयोजन पर रोक और प्रचार करने पर प्रतिबंध लगा दी।
इसके बाद व्ययहार में परिवर्तन न होने की स्थिति में मायावती ने पिछले 7 मई दिन मंगलवार को सोशल मीडिया पर जारी संदेश में आकाश आनंद को पार्टी के नेशनल कोआर्डिटनेटर के पद और अपने उत्तराधिकारी की जिम्मेदारी से हटाने का एलान कर दिया। हालांकि उन्होंने आकाश आंनद के पिता और अपने भाई आनंद कुमार को पार्टी व मूवमेंट के हित में पहले की तरह अपनी जिम्मेदारी निभाते रहने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि बीएसपी का नेतृत्व पार्टी व मूवमेंट के हित में एवं डॉ. आंबेडकर के कारवां को आगे बढ़ाने में हर प्रकार का त्याग व कुर्बानी देने से पीछे हटने वाला नहीं है।

आकाश आनंद को जब सीतापुर मामले में प्रचार करने से रोका गया तो उसके बाद भी वो प्रचार कार्य में लगे रहे। उनका व्यवहार पार्टी सुप्रीमो मायावती को ठीक नहीं लगा। मायावती ने अपने कार्यशैली के तहत पार्टी हित में निर्णय करते हुए अपने ही भतीजे और उत्तराधिकारी को पद से हटाकर सूबे की सियासत में एक कडा संदेश दिया है। मायावती को जानने वाले मान रहे है कि यह मायावती ही है जो अपने पार्टी हित में अपने तारणहार को भी ताड़ना का शिकार बना सकती है।

 

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