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राम दरबार में अब राहुल !

By Shakti Prakash Shrivastva on September 27, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

                           देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर के हिन्दू धर्मावलंबियों की आस्था के प्रतीक है भगवान श्री राम । इसके साथ उनका व्यक्तित्व हिंदूवादी जन मानस में मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में शिरोधार्य है। नब्बे के दशक में भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या से जुड़े विवाद ने भगवान श्रीराम को देश के बहुसंख्यक हिन्दू समाज में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सियासी आस्था के रूप में भी स्थापित कर दिया। यही वजह है कि इसी जनमानसी आस्था के चलते उत्तर प्रदेश में इससे जुड़े आंदोलन की अगुवाई करने वाले सियासी दल भारतीय जनता पार्टी ने न केवल उत्तर प्रदेश में सरकार बनाई बल्कि राष्ट्रीय फलक पर पार्टी को संजीवनी देने का भी काम किया। राम जन्मभूमि से जुड़े विवाद और उससे पनपे आंदोलन के जरिए यह मुद्दा राष्ट्रीय फलक पर लगातार विस्तारित होता रहा। नतीजतन जब इस पर निर्णायक फैसला आया और विवादित भूमि को ही वास्तविक जन्मस्थान होने की न्यायालयी मुहर लगी। तभी से यह तय मान लिया गया कि आगामी लोकसभा चुनाव यानि 2024 के चुनाव से पहले हरहाल में जन्मस्थान पर भव्य श्री राम मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा। इसके पीछे मंदिर निर्माण से जुड़े लोगों की आध्यात्मिक मंशा के साथ-साथ कहीं न कहीं सियासी मंशा भी छिपी हुई थी। उन्हे ऐसा लगता है कि मंदिर का आमजन के लिए दर्शनार्थ खोल दिया जाना सियासत में बेहतर चुनाव परिणाम दिलाने की गारंटी दे सकता है। लिहाजा राज्य और केंद्र की सरकारों के अलावा निर्माण से जुड़े ट्रस्ट आदि के पदाधिकारियों की भी गतिविधियां इस चुनावी वर्ष में खासी बढ़ गई हैं। क्योंकि अगले साल की शुरुआत में ही लोकसभा का चुनाव है। इस सियासी निशाने का संधान करने के लिए बीजेपी के अलावा अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं की प्राथमिकता में भी अब राममंदिर शामिल हो गया है। अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी अपने सियासी निशाने का संधान करने के लिए राम मंदिर के दर्शनार्थ अयोध्या आने वाले हैं। मिल रही जानकारी की मुताबिक इस बाबत उनकी यात्रा की तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं। राहुल गांधी ने जब देश के दक्षिणी हिस्से से उत्तरी हिस्से तक की भारत जोड़ो यात्रा निकाली थी। उस समय प्रदेश के मात्र दो या तीन जिलों से ही होकर उनकी यात्रा गुजरी। क्योंकि उस समय उन्हे ऐसा लगा कि जिस राज्य में कांग्रेस पार्टी की सियासी जमीन मजबूत नहीं है तो यहाँ समय क्यों जाया किया जाए। लेकिन सियासी मजबूरी कह लें या समय का तकाजा आज उसी राहुल गांधी को अयोध्या की यात्रा की योजना बनानी पड़ रही है।

राहुल गांधी के इस प्रतिष्ठापरक यात्रा के संयोजक व राजीव गांधी फाउंडेशन के सीईओ विजय महाजन ने इस बाबत पिछले दिनों अयोध्या की यात्रा भी की। उन्होने वहाँ स्थानीय कांग्रेस नेताओं के साथ इस यात्रा के बाबत राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी से मुलाकात भी की। मुख्य पुजारी से मुलाकात के दौरान राहुल गांधी के राम जन्मभूमि मंदिर दर्शन के कार्यक्रम पर विस्तार से उनकी चर्चा हुई। सूत्रों से मिली जानकारी पर यकीन करें तो राहुल गांधी का यह प्रस्तावित दौरा राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा से पहले भी हो सकता है और उसके बाद भी। रामलाल के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा दर्शन करने के लिए हर व्यक्ति को आने का अधिकार है। यदि राहुल गांधी रामलला के दर्शन करने के लिए आते हैं तो उनका स्वागत है। राहुल गांधी का राम मंदिर आगमन उनका ऐसा पहला मौका होगा जब राहुल अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन करने जाएंगे। इन दिनों मंदिर का निर्माण तेजी के साथ चल रहा है क्योंकि  जनवरी में ही भगवान श्रीराम की भव्य मूर्ति का भी मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा प्रस्तावित है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी 2017 में कांग्रेस पार्टी की किसान यात्रा में शामिल होने अयोध्या पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने प्रसिद्ध हनुमान गढ़ी पहुँच हनुमानजी का दर्शन किया था। हालांकि उस समय उन्होंने राम मंदिर से दूरी बना ली थी। 25 साल बाद तब वह पहला मौका था जब  नेहरू-गांधी परिवार का कोई सदस्य अयोध्या पहुंचा हुआ था। ऐसा देखा गया है कि बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद से ही गांधी परिवार ने अयोध्या से दूरी बना ली थी।

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