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April 13, 2026
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प्रशांत नहीं रहेंगे शांत !

By Shakti Prakash Shrivastva on April 15, 2025
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                                                                      शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

देश के चुनिंदा सियासी रणनीतिकारों में प्रशांत किशोर का नाम शुमार है। लेकिन सियासी दलों के लिए रणनीति बनाने वाले प्रशांत किशोर को जब दलों के सियासी महाबल का एहसास हुआ तो उन्होंने तय किया कि यह बल अब अपने लिए क्यों न हासिल किया जाए। फिर क्या था उन्होंने अपने गृह प्रदेश बिहार की ओर कूच किया। जन सुराज पार्टी का गठन किया। पार्टी के भविष्य के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए उन्होंने बिहार भ्रमण करने का निर्णय लिया। जिससे की उन्हे प्रदेश की जमीनी हकीकत पता हो सके। इसके लिए उन्होंने जनसुराज यात्रा निकाली। ठीक-ठाक जन जागरण करने में सफल भी रहे। अब जबकि बिहार का विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है। प्रशांत किशोर ने पार्टी की सियासी ताकत से प्रदेश वासियों को एहसास कराने की नीयत से पटना के गांधी मैदान में एक भव्य प्रदर्शन करने का निर्णय लिया। लगभग पाँच लाख लोगों के लिहाज से कार्यक्रम में व्यवस्था की गई। लेकिन प्रशांत के सपनों पर बजपात तो तब हो गया जब कार्यक्रम में अपेक्षा के अनुकूल लोग नहीं आए। भीतर से मायूस शाम को कार्यक्रम मंच से लोगों की कम उपस्थिति के लिए सीधे तौर पर माफी मागते हुए प्रशासन के असहयोग पर ठीकरा फोड़ दिया। कहा कि प्रशासन की अव्यवस्था के चलते लाखों की संखया में लोग कार्यक्रम स्थल तक नहीं पहुँच सके। सियासी गलियारे में ऐसी चर्चा होने लगी कि पहले ही कार्यक्रम में इस तरह फ्लाप शो से प्रशांत का मनोबल हिल गया है। लेकिन ऐसा नहीं है प्रशांत हताश होने वालों में नहीं है उन्होंने शासन-प्रशासन के असहयोग के बावजूद ऐलान किया है कि एक पखवारे के भीतर ही बिहार बदलाव यात्रा शुरू की जाएगी। यह यात्रा प्रदेश के हर ब्लाक और ग्राम पंचायतों तक जाएगी।

उन्होंने कहा कि प्रशासन के असहयोग के बाद भी अगर जनता ने मन बना लिया है तो बिहार में बदलाव को कोई नहीं रोक सकता। इसके लिए अभी आंधी चल रही है। किशोर की मुताबिक यदि लोग राजद शासन के ‘अपराधियों द्वारा फैलाए गए जंगल राज’ को खत्म कर सकते हैं, तो वे नीतीश शासन के ‘अधिकारियों द्वारा फैलाए गए जंगल राज’ को भी खत्म कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि नवंबर में ‘जनता की सरकार’ के लिए अगले छह महीनों के लिए तैयार हो जाइए। आज नीतीश कुमार लोगों को यहां आने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अगर मैंने 2015 में उनकी मदद नहीं की होती तो वे उसी समय रिटायर हो गए होते। किशोर ने कहा कि नवंबर में वह नीतीश कुमार का ‘राजनीतिक अंतिम संस्कार’ सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि वह लोगों को गांधी मैदान तक पहुंचने में मदद करने के लिए इधर-उधर घूम रहे थे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ, क्योंकि प्रशासन सहयोग नहीं कर रहा था।

कार्यक्रम में लोगों की कम संख्या पर जेडीयू ने व्यंग्य करते हुए कहा कि रैली में उतनी ही उपस्थिति थी जितनी सामान्य तौर पर गांधी मैदान में शाम को टहलने वालों की होती है। जेडीयू प्रवक्ता नीरज की माने तो रैली के माध्यम से पीके यानि प्रशांत किशोर ने खुद को उजागर करके अच्छा काम किया है और अपनी असफलताओं के लिए दूसरों पर दोष मढ़ने का कोई मतलब नहीं है। उन्हें लगता था कि राजनीति एक व्यवसाय है, लेकिन ऐसा नहीं है। उन्हें संदेश मिल गया है। बड़ी-बड़ी बातें करने से बदलाव नहीं आता है। लेकिन प्रशांत भी प्रशांत है। इस तरह की बातों से बेपरवाह नए सिरे से सियासी मैदान सजाने में लग गए हैं।

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