October 3, 2022
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उत्तराखंड : फिर बदले जाएँगे सीएम, सीएम रावत ने की इस्तीफे की पेशकश

By Shakti Prakash Shrivastva on July 2, 2021
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नयी दिल्ली, (संवाददाता)। कहतें हैं कि राजनीति की अपनी एक अलग परिभाषा होती है। उदाहरण के तौर पर यही देखें कि जो परिस्थितियाँ उत्तर प्रदेश में सीएम योगी के बचाव का कारण बनी वही उत्तराखंड में सीएम रावत की बर्बादी का कारण बन रही है। परिस्थितियाँ कुछ ऐसे हालात की ही चुगली भी कर रहे हैं कि उत्तर प्रदेश सीएम के बदले जाने की खबरें यह तर्क दे झुठला दी गयी कि विधानसभा चुनाव मे कम समय शेष है लिहाजा इससे जनता में गलत संदेश जाएगा जबकि उत्तराखंड के लिए सीएम के न बदले जाने पर जनता में गलत संदेश जाने का तर्क दिया जा रहा है। सच्चाई जो भी हो यह तो हफ्ते भीतर पता चल ही जाएगा फिलहाल खबर है कि उत्तराखंड के सीएम तीरथ सिंह रावत बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा से शुक्रवार को मुलाक़ात कर उन्हे सीएम पद से इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं।

उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। लेकिन यह बात समझ से परे है कि मार्च में ही त्रिवेन्द्र सिंह रावत से इस्तीफा लेकर उनकी जगह जिस तीरथ सिंह रावत को 10 मार्च को विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सत्ता की चाभी थमाई गयी। ऐसा क्या हुआ कि महज चार महीने के अंदर ही उनसे फिर चाभी वापस मांगी जा रही है। जबकि उत्तर प्रदेश में तो सीएम से असंतुष्ट सैकड़ों की संख्या में विधायकों ने बाकायदा विधानसभा में विरोध प्रदर्शन तक किया था। लेकिन वहाँ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और जहां जाहिरा तौर पर कोई विरोध नहीं हुआ लेकिन वहाँ एक बार कौन कहे दो-दो बार सीएम बदले जा रहे हैं। बहरहाल तीरथ सिंह रावत के दिल्ली से शुक्रवार शाम देहरादून पहुँचते ही खबर आनी शुरू हो गयी है कि सीएम ने उपचुनाव की संभावना न बनने की स्थिति में इस्तीफा देने की पेशकश की है। श्री रावत चूंकि सांसद है उन्हे सीएम पद पर बने रहने के लिए छः महीने के अंदर 10 सितंबर से पहले विधानसभा का सदस्य होना अनिवार्य है। प्रदेश में गंगोत्री और हल्द्वानी दो ऐसे क्षेत्र है जहा उपचुनाव होने थे। इनमें से ही किसी से इन्हे चुना जाना था लेकिन अब बदली परिस्थिति में उपचुनाव न हो पाने का हवाला देकर ही इन्हे हटा किसी और की ताजपोशी की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि धन सिंह रावत, हरख सिंह रावत और सतपाल महराज जैसे विधायकों में से किसी एक पर पार्टी चुनावी दांव लगा सकती है। इन सब से इतर तीरथ सिंह का पद पर बैठते ही विवादित बयानो को लेकर पार्टी की मुश्किलें बढ़ाते रहना और बीजेपी के प्रदेश सरकार के कामकाज की समीक्षा में भी उत्तराखंड का फिसड्डी साबित होना मौजूदा घटनाक्रम की मूल वजह मानी जा रही है। कुंभ व कोरोना में भी सरकार ने कुछ उल्लेखनीय काम नहीं किया था।

 


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