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35 रुपये लीटर पेट्रोल!

By Shakti Prakash Shrivastva on October 10, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

              आज देश में सुरसा के मुंह की तरह बढ़ रही मंहगाई के पीछे बहुत बड़ा कारण पेट्रोल-डीजल का भी रहता है। क्योंकि देश में आज भी रोज़मर्रा सहित बहुत सारी आवश्यक वस्तुओं का ट्रांसपोर्टेशन ट्रकों के माध्यम से ही होता है। ट्रक का ईंधन मंहगा होने के कारण वस्तुओं के दाम निर्धारण पर भी उसका असर पड़ता ही है। आज देश में पेट्रोल और डीजल के दाम कमोबेश 100 के आंकड़े के इर्द-गिर्द पहुँच गया हैं। ऐसे में अगर कोई इन दामों के तिहाई दाम में पेट्रोल बनाकर उसे मुनाफे के साथ बाजार में बेच रहा है तो आश्चर्य का होना लाजिमी है। एसटीएफ ने ताजनगरी आगरा में एक ऐसे ही गिरोह को पकड़ने में कामयाबी पाई है। जो मात्र 35 रुपये में पेट्रोल बनाकर उसे बाजार में अच्छे खासे मुनाफे के साथ बेचा करते थे।

आगरा के जगदीशपुरा थाना क्षेत्र के अवधपुरी इलाके में 30 रुपये में नकली डीजल और 35 रुपये में नकली पेट्रोल बनाकर उसे बाजार में 55 से 65 रुपये प्रति लीटर बेचा जा रहा था। इसके लिए बकायदे शातिर दिमाग वालों का एक नेटवर्क था जो पेट्रोल व डीजल में साल्वेंट, थिनर व अन्य केमिकल मिलाते थे। इस तरह केमिकल और कुछ अन्य समग्रियों को मिलाकर ये गिरोग सस्ते मेन पेट्रोल-डीजल बनाता था और उसे गाँव-गिराने के बाज़ारों में बेचा करते थे। इसके लिए इनकी माल लदी गाडियाँ बकायदे भोर में चार बजे ही ग्रामीण अंचलों में इन्हें खपाने के लिए निकल जाती थीं। जानकारी मिलने पर जब एसटीएफ की टीम ने यहाँ छापा मारा तो टीम को बड़ी मात्रा में नकली डीजल-पेट्रोल मिला। मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार भी किया। इस संदर्भ में जिला पूर्ति विभाग की ओर से जगदीशपुरा थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।खबर मिलने पर स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की टीम ने सबसे पहले नगला अक्खे शाहगंज और अवधपुरी स्थित दो गोदामों पर छापा मारा था। इन दोनों जगहों को मिलाकर टीम ने यहाँ से कुल 7000 लीटर केमिकल बरामद किया। पुलिस ने गोदामों से योगेश उर्फ अन्नू, संजय उस्मानी निवासी राहुल नगर और रामवीर प्रजापति निवासी मिढ़ाकुर को भी गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान योगेश और रामवीर ने पुलिस टीम को बताया कि वह नकली डीजल-पेट्रोल तैयार करने के लिए साल्वेंट के अलावा कई तरह के केमिकल का इस्तेमाल करते थे। मिलाने के लिए केमिकल ये लोग हरिद्वार से लाया करते थे।

पकड़े गए आरोपियों की मुताबिक इन लोगों को नकली डीजल और पेट्रोल तैयार करने में प्रति लीटर करीब 30 से 35 रुपये खर्चा आता था। इस तैयार नकली डीजल और पेट्रोल को ये लोग  ग्रामीण क्षेत्रों में 55 से लेकर 65 रुपये लीटर तक में बेच देते थे। इस तरह इनको प्रति लीटर 35 रुपये  से लेकर 40 रुपये तक का लाभ हो जाता था। एसटीएफ के क्षेत्राधिकारी उदय प्रताप सिंह की मुताबिक मामले में जिला पूर्ति विभाग की ओर से केस दर्ज कराया गया है। अब गोदाम मालिक और इस खेल से जुड़े अन्य लोगों की पुलिस तलाश कर रही है। इस बात का भी पूरा अंदाजा है कि यह खेल इलाके में अन्य जगहों पर भी खेला जा रहा होगा। लिहाजा पुलिस का प्रयास है की इस तरह के पूरे नेटवर्क को ही ध्वस्त कर दिया जाये। केमिकल और सालवेंट आदि को मिलाकर खतरनाक पेट्रोल और डीजल बनाने वाले इस गिरोह की क्षुधा इतने फायदे से नहीं शांत होने वाली थी बल्कि इससे इतर वो घटतौली जैसा निकृष्ट काम भी करते थे। बाजार में बिक्री करते समय ये एक लीटर की जगह मात्र 800 मिली लीटर ही ईंधन देते थे। इसके लिए इन शातिर दिमाग लोगों ने एक लीटर के मग में सीमेंट डालकर उसे 800 मिलीलीटर का कर दिया था। डीजल-पेट्रोल बाजार से 30 से 35 रुपये सस्ता होने के कारण ग्रामीण बहुत छानबीन नहीं करते थे। जबकि इस तरह के पेट्रोल और डीजल के प्रयोग की वजह से गाड़ियों के इंजन को खासा नुकसान पहुँचता है। लेकिन अधिकांशतः लोग दाम में सस्ता होने की वजह से इस्तेमाल करते हैं।

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