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सुप्रीम कोर्ट ने एमपी हाईकोर्ट के आदेश को किया रद्द, जमानत के लिए रखी थी राखी बंधवाने की शर्त

By Nikhil Pal on March 18, 2021
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नई दिल्ली(एजेंसी)- सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के एक आदेश को रद्द कर दिया है। महिला वकीलों के एक समूह द्वारा दायर अपील की अनुमति देते हुए उच्च न्यायालय के एक निर्देश पर सवाल उठाया कि आरोपी को यौन उत्‍पीड़न के मामले में जमानत की शर्त के रूप में पीड़िता द्वारा उसके हाथ पर ‘राखी’ बांधी जानी चाहिए। मध्‍य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर काफी हंगामा मचा था।

हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने बताया गलत

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पिछले साल 30 जुलाई को यौन उत्पीड़न के एक मामले में आरोपी को इस शर्त पर जमानत दी थी कि वह पत्नी के साथ पीड़िता के पास जाएगा और पीड़िता से राखी बांधने का अनुरोध करेगा, साथ ही उसे अपनी सामर्थ्‍य भर हमेशा सुरक्षा देने का वचन देगा। नौ महिला वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। याचिका में मांग की गई है कि अदालतों को आदेश दिया जाए कि वे यौन उत्पीड़न के मामले में इस तरह के आदेश न दें। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ कर रही है।मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश की सोमवार को आलोचना करते हुए अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि लगता है न्यायाधीश अपने दायरे से आगे निकल गए, यह महज ड्रामा है। इसकी निंदा होनी चाहिए। वेणुगोपाल ने कहा था कि जजों को जेंडर सेंस्टाइजेशन (महिलाओं के प्रति संवेदनशील) का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जमानत की शर्तों के बारे में सुप्रीम कोर्ट का आदेश सभी वेबसाइट्स पर अपलोड किया जाना चाहिए ताकि उन्हे पता रहे कि क्या किया जा सकता है और क्या नहीं। अटार्नी जनरल ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला ज्युडिशियल एकेडेमी में पढ़ाया जाना चाहिए और उसे ट्रायल कोर्ट व हाईकोर्ट के समक्ष भी रखा जाना चाहिए ताकि जजों को पता रहे कि उन्हें क्या करना चाहिए।

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