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July 21, 2024
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योगी से तकरार के मूड में अनुप्रिया !

By Shakti Prakash Shrivastva on June 30, 2024
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                                                                                          शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

नैसर्गिक तौर पर जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी परिभाषाएं है जो जीवन के हर क्षेत्र में प्रासंगिक होती है। जैसे शरीर जब कमजोर होता है तभी बीमारियाँ शरीर पर अपना प्रभाव दिखाती है। मजबूत शरीर पर उनका जोर नही चलता है। यही हाल जीवन में जब कोई व्यक्ति मजबूत से अपेक्षाकृत कमजोर होता है तो उसे भी समाज में पूर्व का सम्मान नहीं मिल पाता है। समाज के ऐसे-ऐसे लोग जो कभी नजदीक आने में घबराते हों वो भी सामने नजर से नजर मिलाने लगते हैं। ऐसा ही कुछ उत्तर प्रदेश की सियासत में दिखने लगा है। प्रदेश में योगी आदित्यनाथ जैसे जिस मुख्यमंत्री के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की भी दाल आसानी से नहीं गलती हो वहाँ अचानक एनडीए के घटक दल की एक मुखिया उन्हे नसीहत देने की स्थिति में आ गई है।

हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने अलग तेवर के लिए जाने जाते हैं। तेवर के चलते ही उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के खासमखास रहे ब्यूरोक्रेट ए के शर्मा को बहुत आसानी से प्रदेश में सहज नहीं होने दिया। एक तरह से मायूस हो चुके शर्मा को आखिरकार योगी का जब समर्थन मिला तभी वो प्रदेश सरकार में बिजली जैसे महत्वपूर्ण विभाग के आज कैबिनेट मंत्री है। इसके पहले जब दिल्ली से उन्होंने लखनऊ का रुख किया था तब मीडिया की सुर्खियों में उन्हे सरकार के उपमुख्यमंत्री के तौर पर पदस्थ होने की खबरे प्रसारित हो रही थी। लेकिन उन्हे वर्तमान लक्ष्य की प्राप्ति के लिए लंबा समय जाया करना पड़ा। इन सभी जानकारियों के बावजूद मौजूदा सियासी परिदृश्य में लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद प्रदेश में अपेक्षाकृत कम सफल रही बीजेपी को अपना दल एस की मुखिया अनुप्रिया पटेल तक नसीहत देने की स्थिति में आ गई हैं। उन्होंने अपनी अनुभव और वरिष्ठता की गरिमा के विपरीत एक पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक नसीहत भरा पत्र लिखा है। दो बार से केंद्र सरकार में सहयोगी रहे दल की मुखिया द्वारा ऐसे आशय का पत्र पहली बार लिखा गया है। पत्र में पटेल ने योगी की रामराजी व्यवस्था को ललकारते हुए लिखा है कि प्रदेश सरकार की साक्षात्कार वाली नियुक्तियों में ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों को यह कहकर छांट दिया जाता है कि वह योग्य नहीं हैं और बाद में इन पदों को अनारक्षित घोषित कर दिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि ओबीसी अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री को लिखे अपने पत्र में उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की साक्षात्कार वाली नियुक्तियों में नियुक्ति प्रक्रिया भले ही कई बार में पूरी हो लेकिन हर हाल में सीटें उन्हीं वर्गों से भरी जाएं जिनके लिए आरक्षित की गई हों न कि योग्य नहीं होने की बात कहकर सीटों को अनारक्षित कर दिया जाए।

इस तरह से ऐसा लगता है कि लोकसभा चुनाव में महज एक सीट पर सिमटने वाली अपना दल एस सुप्रीमो का यह रुख गठबंधन की पेशानी पर बल डालने के लिए काफी है।

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