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मैनपुरी उपचुनाव : डिम्पल को जिताने के लिए अखिलेश ने चला सिम्पल दांव

By Shakti Prakash Shrivastva on November 18, 2022
0 499 Views

शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव की आवाज में रिपोर्ट सुनने के लिए आडियो बटन पर क्लिक करें।

शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

मैनपुरी लोकसभा सीट के लिए हो रहे उपचुनाव में समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी और पत्नी डिम्पल यादव को जिताने के लिए सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने एक सिम्पल दांव चला है। जिस दांव के चलते उनके पिता और पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव लगातार इस सीट पर अजेय बने रहे। खुद भी जीतते रहे और औरों को भी जिताते रहे। वो दांव था उनके व्यवहार का। जिसमे लोगों से मिलना, सामान्य तरीके से आम और खास के घर पहुँच कर उनका हाल-चाल जानना, लोगों के सुख-दुख में शरीक होना और सीधे नाम से बुलाकर आत्मीयता जताना जैसे गुण ही थे जिनकी वजह से मुलायम सिंह यादव लोगों के लिए नेताजी बन गए थे। मैनपुरी के मतदाताओं ने नेताजी के इसी व्यवहार से उन्हें पाँच बार लोकसभा की दहलीज में दाखिल होने का मौका दिया। इस बार अपने पिता की इसी शैली को पहली बार अखिलेश यादव ने अपने व्यवहार में शामिल किया है। डिम्पल के प्रचार के लिए मैनपुरी में डेरा डाले अखिलेश अब अपने पिता की डगर पर ही चल रहे हैं। वो भी घर-घर नेताजी की ही अंदाज में जाकर मिल रहे हैं। लोगों से आत्मीयता जता रहे हैं। पहली बार नेताजी की ही तरह अखिलेश इस बार मैनपुरी में अचानक लोगों के घर-घर पहुंच रहे हैं। 14 नवंबर को डिंपल के नामांकन से पहले जहां अचानक अखिलेश यादव पूर्व विधायक रामेश्वर दयाल बाल्मीकि, सतीश सिंह राठौर और विद्याराम यादव के घर पहुंच गए वहीं  नामांकन के बाद शहर के पंजाबी कॉलोनी स्थित श्री एकरसानंद आश्रम पहुंचकर ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर शारदानंद सरस्वती की समाधि पर पुष्प भी अर्पित किया। सैफई लौटते समय करहल में राहुल जैन और नेताजी के करीबी पूर्व एमएलसी सुभाष यादव के आवास पर भी गए थे। दोनों जगह उन्होंने खासा समय बिताया और लोगों से मुलाकात की। लोगों को अखिलेश के व्यवहार मे यह बदलाव देख अचरज भी हो रहा है और खुशी भी। नेताजी के नजदीकी रहे लोगों का मानना है कि नेताजी का यही एक गुण ऐसा है जिसे यदि अखिलेश अपना लें तो उनका व्यक्तित्व और निखर जाएगा। शुभ ये है कि अखिलेश अपने व्यवहार में इस गुण को अपना रहे हैं। नेताजी को उनकी इन्ही गुणों के नाते जमीनी नेता माना जाता था। अखिलेश यादव के इस बदले व्यवहार को देख लोगों को नेताजी की याद आ रही है। क्योंकि वो अखिलेश जो अपने चुनाव तक में लोगों से जमीनी और सामान्य तौर तरीकों से मिलने में परहेज करते थे। इस बार स्वयं मिल रहे हैं। 2022 की फरवरी महीने में हुए विधानसभा चुनाव में करहल से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव स्वयं प्रत्याशी थे। लेकिन उन्होंने करहल विधानसभा क्षेत्र में केवल दो जनसभाएं की थीं। घर-घर जाकर तो जनसम्पर्क किया ही नहीं था। उन्के लिए जनसम्पर्क पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव और तेजप्रताप यादव ने किया था।

मैनपुरी से पाँच बार संसद पहुँचने वाले नेताजी मुलायम सिंह यादव के निधन से रिक्त हुई सीट पर हो रहे उपचुनाव में इस बार उनकी बहू और अखिलेश की पत्नी डिम्पल यादव सपा प्रत्याशी हैं। उन्हें पारिवारिक मतभेद के बावजूद चाचा शिवपाल यादव का समर्थन इस चुनाव में मिल रहा है। नेताजी की गैरमौजूदगी में अपने नेता अखिलेश यादव में यह शुभ परिवर्तन देख हर पार्टी कार्यकर्ता खुश है। अखिलेश यादव में अपने पिता की तरह का यह जुड़ाव उन्हें कहां ले जाएगा ये तो वक्त ही तय करेगा। लेकिन शुभ ही होगा ये पार्टी कार्यकर्ताओं को भरोसा है।

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