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आप के लिए संकट पर संकट !

By Shakti Prakash Shrivastva on February 12, 2025
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                                                                          शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम ने आप यानि आम आदमी पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। या ये कहे कि आप के लिए परिणाम के बाद से ही संकट पर संकट आने लगा है। लगातार दो चुनावों में जीत दर्ज करने के बाद जब इस बार पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा तो इस हार को न पार्टी आलाकमान आसानी से पचा पा रहा है और न ही उसके आम कार्यकर्ता। सत्ता का सुख होता ही ऐसा है। वो भी एक-दो साल नहीं बल्कि दसियों साल तक लगातार सत्ता का सुख भोगना। इस चुनाव में जहां आम आदमी पार्टी की करारी हार हुई वहीं कांग्रेस जैसी पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका। ऐसी परिस्थिति में विपक्षी गठबंधन आइएनडीआईए के मुख्य घटक इन दोनों पार्टियों के बीच रिश्ते तल्ख होने लगे है। तल्खी का आलम ये है कि अब सवाल उठने लगा है कि आप विपक्षी गठबंधन आइएनडीआईए का हिस्सा रहेगी भी या नहीं? और रहेगी भी तो कब तक। ऐसे में आप के लिए हार के रूप में मिले संकट के बाद अब गठबंधन सहयोगियों से रिश्ते खराब होने का दूसरा संकट परेशान कर रहा है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आते ही शनिवार से अचानक दिल्ली की सियासत में गर्माहट तेज हो गई है। ऐसी संभावना विपक्षी दलों के गठबंधन आइएनडीआईए के दो महत्वपूर्ण घटक दलों आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के अहम टकराने की वजह से बनी। वैसे भी हाल के दिनों में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच रिश्ते बहुत मधुर नहीं रह गए थे। यही वजह है कि दिल्ली चुनाव में दोनों के बीच तालमेल नहीं बन सका और दोनों को अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरना पड़ा। चुनाव परिणाम की मुताबिक दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में 48 सीटों पर बीजेपी और 22 सीटों पर आम आदमी पार्टी को विजय मिली। कांग्रेस जैसी पार्टी का खाता तक नहीं खुल सका। यहाँ 27 सालों का वनवास काटने के बाद प्रचंड बहुमत के साथ बीजेपी ने सत्ता में वापसी की। इस परिणाम से दिल्ली में आप की सरकार नहीं बन सकी। आम आदमी पार्टी सहित कुछ सियासी जानकारों ने यह माना कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की हार की मुख्य वजह कांग्रेस रही। उनकी मुताबिक कांग्रेस अगर साथ चुनाव लड़ती तो शायद आज तस्वीर दूसरी होती। शायद की इसी टीस ने आप के लिए संकट खड़ा कर दिया। क्योंकि उससे दोनों दलों के रिश्तों के बीच की विश्वास की खाई और गहरी हो गई। इससे ऐसा लगने लगा है कि देर सबेर विपक्षी गठबंधन आइएनडीआईए से आप के रास्ते अलग हो जाएंगे या कर दिए जाएंगे।

हालांकि कांग्रेस के दिग्गज नेता और सांसद राजीव शुक्ला से गठबंधन में आप की स्थिति के बारे मे पूछा गया तो उनका कहना था कि विपक्षी एकता मजबूत है और ऐसे ही रहेगी। आप के रहने न रहने का फैसला वरिष्ठ जन तय करेंगे। जबकि कांग्रेस नेता मुमताज पटेल का मानना है कि क्या आप की जीत सुनिश्चित करना कांग्रेस की जिम्मेदारी है? क्या उन्होंने गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र चुनावों में इसके बारे में सोचा था? उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस भारत में दूसरी सबसे बड़ी राष्ट्रीय पार्टी हैं। अगर हमने आप के साथ गठबंधन किया होता और आप सत्ता में आती, तो हमें इससे क्या फायदा होता?

इस तरह के बयान से यह तय लगता है कि कांग्रेस और आप के बीच की तल्खी जल्द ही कुछ गुल खिलाएगी।

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