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CM सिटी गोरखपुर : पहले पानी की बाढ़ अब योगी के विकास की बाढ़

By Shakti Prakash Shrivastva on November 30, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव की आवाज में रिपोर्ट सुनने के लिए आडियो बटन पर क्लिक करें।

शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

    इसको कहते हैं समय का चक्र। एक समय था कि हर साल गोरखपुर का अधिकांश हिस्सा राप्ती नदी की बाढ़ का दंश झेलने को मजबूर रहता था। लेकिन समय बदला और सूबे में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद अब आलम ये है कि इस इलाके में पानी की बाढ़ की बजाय विकास योजनाओं की बाढ़ सी आ गयी है। हालिया उदाहरण पर गौर करें तो महज दो दिनों पहले 27 नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में 1822 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास किया था और फिर आज 30 नवंबर को 504 करोड़ रुपये की निवेश परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण उनके द्वारा हो रहा हैं। पिछले पाँच सालों के उनके मुख्यमंत्रित्व काल में कई हजार करोड़ के जो विकास कार्य इस इलाके में हुए हैं आज उसका गवाह यहाँ का नगर-नागरिक हैं। जबकि इसमें लगभग दो साल का समय तो कोरोना की भेंट चढ़ गया था। बावजूद सड़क, नाली, बिजली, पानी, सीवर, पाइपलाइन के जरिये कुकिंग गैस वितरण, पार्क, आडिटोरियम, रामगढ़ताल सुंदरीकरण, ई-नगरबस, एयरपोर्ट विस्तार, एम्स, मेडिकल कालेज में सुविधाए जैसे अनगिनत ऐसे कार्य हैं जो विकासी बाढ़ के साक्ष्य हैं। इतना ही नहीं नब्बे के दशक से बंद पड़े फर्टिलाइजर कारख़ाना को दुबारा चलाना, पिपराइच सहित मुंडेरवा चीनी मिलों को चलाना, गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) को समृद्ध करते हुए उसका दायरा बढ़ाना, गीडा के जरिये औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करना। ये सब ऐसे कार्य हैं जो विकास की बाढ़ की कहानी कहते हैं।      इलाके में औद्योगिक विकास की तस्वीर जिस गीड़ा के माध्यम से आज दिख रही है उस गीड़ा की नींव आज ही के दिन 30 नवंबर 1989 को पड़ी थी। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीड़ा) की स्थापना न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा) की तर्ज पर की गयी थी। लेकिन विकास की दौड़ में एक लंबे समय तक गीड़ा पिछड़ा रहा। सिर्फ नाम मात्र का औद्योगिक विकास प्राधिकरण बना रहा। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब 1998 में पहली बार गोरखपुर के सांसद बने तब उन्होने गीडा के विकास और औद्योगिक माहौल बनाने के लिए संघर्ष शुरू किया। लेकिन विपक्ष का सांसद होने की वजह से उनकी आवाज जमीनी विकास में तबदीली लाने में नाकाम रही। उनके इस प्रयास में सकारात्मक बदलाव तब शुरू हुआ जब वो सूबे के मुख्यमंत्री बने। आज इलाके का विकास किसी से छुपा नही है। पानी की बाढ़ और विकास की बाढ़ में मुख्य फर्क ये है कि पानी की बाढ़ जहां अधिकांशतः विनाश की गाथा लिखती है वहीं विकास की बाढ़ बेरोजगारों को रोजगार सरीखी कितनी समस्याओं का समाधान लाती है।

 

 

 

 

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