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चुनाव में ‘चोट’ की तैयारी में बीएसपी

By Shakti Prakash Shrivastva on December 7, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

देश के पाँच राज्यों में हुए हालिया विधानसभा चुनाव के परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि पिछले दिनों अस्तित्व में आए विपक्षी दलों का गठबंधन आइएनडीआइए की मजबूती उतनी नही है जितनी की उम्मीद की जा रही थी। यानि चुनावों में इस गठबंधन की वजह से बीजेपी को जिस नुकसान की उम्मीद जताई जा रही थी वो कपोल काल्पनिक निकली। जबकि आपस में विचारों को लेकर मतभेद रखने वाली सियासी पार्टियों ने भी गठबंधन के नाम पर एक साथ बैठना महज इसलिए कबूल कर लिया था कि उन्हे हर हाल में बीजेपी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाना था। हालांकि इस परिणाम के लिए अब 2024 के लोकसभा चुनाव परिणाम तक उन्हे इंतजार करना पड़ेगा। लेकिन जिस तरह से इन पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों में गठबंधन के घटक दलों ने आपस में जो सियासी जूतम पैजार किया है उससे कही से इस बात की संभावना नहीं लग रही है कि ये बीजेपी का लोकसभा चुनाव में मजबूती से मुकाबला कर सकेंगी। क्या सपा, क्या जदयू, क्या राजद, क्या वामदल और क्या अन्य दल सभी के रवैये ने इस बाबत निराश ही किया है। यहाँ तक कि राष्ट्रीय फलक पर अपना सियासी वजूद रखने वाली बीएसपी जैसी एक वर्ग विशेष की नुमाइंदगी करने वाली पार्टी ने भी गठबंधन का विरोध करने का निर्णय लिया है। विपक्षी गठबंधन के अलावा बीएसपी ने बीजेपी का भी विरोध करने का निर्णय लिया है। बीएसपी का यह ऐलान लोकसभा चुनाव में आइएनडीआईए और एनडीए दोनों को ही चोट पहुंचाने के लिये काफी है।

उत्तर प्रदेश के संदर्भ में बात करे तो यह तो तय है कि लोकसभा चुनाव में यहा मुख्य मुकाबला आइएनडीआईए-एनडीए गठबंधन के बीच ही होने वाला है। ऐसे में जब उत्तर प्रदेश में दलित वोटरों पर एकाधिकार रखने वाली बीएसपी सुप्रीमों मायावती ने अकेले ही लोकसभा चुनाव लड़ने का एलान कर दिया हैं। तो उनका यह ऐलान आइएनडीआईए-एनडीए गठबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

बीजेपी के लिए मजबूत किला माने जाने वाले बुंदेलखंड में बीएसपी ने जमीनी स्तर पर तैयारियां अभी से शुरू कर दी हैं। यहाँ लोकसभा की कुल दस सीटें हैं। पार्टी की तरफ से कानपुर, कानपुर देहात, कन्नौज, इटावा में ऐसे चेहरे की तलाश हो रही है, जिसकी आम जनमानस के बीच ठीक-ठाक स्वीकार्यता हो। इसके अलावा दूसरी तरफ बीएसपी सपा को कन्नौज और इटावा में घेरने के मूड मे है। बीएसपी सुप्रीमों मायावती को पता हैं कि सपा मुखिया अखिलेश यादव कन्नौज से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। ऐसे में अखिलेश यादव के लिए कन्नौज में घेराबंदी शुरू कर दी गई है। कन्नौज और इटावा में बीएसपी के कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर काम में लग गए हैं। कानपुर और कानपुर देहात की अकबरपुर लोकसभा सीट के लिए भी दमदार  प्रत्याशियों की खोज की जा रही है।

पिछले 2019 के लोकसभा चुनाव  में सपा और बीएसपी के बीच गठबंधन था। तब बीएसपी के प्रत्याशियों ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी थी। कई सीटों पर जीत हार का आंकड़ा बेहद कम था लेकिन इस बार 2024 के चुनाव में बीएसपी की सीधी लड़ाई आइएनडीआईए और एनडीए गठबंधन से है। कानपुर-बुंदेलखंड की झांसी, बांदा, हमीरपुर, ललितपुर में बीएसपी बीजेपी का नुकसान कर सकती है। जबकि कन्नौज, इटावा और फर्रूखाबाद की लोकसभा सीटों पर वह सपा के लिए परेशानी खड़ा कर सकती है। कानपुर और कानपुर देहात की अकबरपुर लोकसभा सीटों पर बीएसपी आइएनडीआईए और एनडीए दोनों का नुकसान कर सकती है। ऐसा इसलिए कि अभी भी बीएसपी के पास दलित मतदाताओं की खासी जमात है और प्रदेश में लगभग 20 फीसदी दलित वोटर है। ऐसे में इसका लाभ बीएसपी को मिलना और अन्य को इसका नुकसान होना संभव लग रहा है।

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