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July 22, 2026
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सपा के पीडीए की बीजेपी काट !

By Shakti Prakash Shrivastva on March 19, 2025
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                                                                                शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव
उत्तर प्रदेश के सियासी संदर्भ में अगर बात करे तो बीजेपी की सफलता के साल दर साल बढ़ते ग्राफ को लोकसभा चुनाव परिणाम ने एक बारगी रोक सा दिया था। क्योंकि पिछले लगभग दस सालों में प्रदेश में बीजेपी गठबंधन की सियासी पकड़ बहुत तेजी से मजबूत हुई है। एकतरफ तो वो लोकसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार बहुमत की सरकार बनाने में सफल रही। वहीं प्रदेश विधानसभा में भी लगातार दूसरी बार सरकार बनाने का रिकार्ड कायम किया। लेकिन खुशफहमी दिलाने वाले इन परिणामों में केंद्र की तीसरी सरकार बनाने में बीजेपी को अपने गठबंधन सहयोगियों की भी सहायता लेने को मजबूर होना पडा। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि लोकसभा चुनाव में प्रदेश में बीजेपी का मुकाबला समाजवादी पार्टी के साथ-साथ कांग्रेस के गठबंधन से था। जिसमें इन विरोधियों ने अपनी एक फार्मूले से बीजेपी गठबंधन को जमीन दिखा दी थी। वो फार्मूला और कुछ नहीं बल्कि सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के सियासी समझ की उपज पीडीए फार्मूला था। मतलब पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यको वाला फार्मूला। इसी त्रिवर्गीय फार्मूले की बलबूते ही अखिलेश यादव ने बीजेपी को केंद्र में अकेले दम पर आसानी से सरकार नहीं बनाने दी। लेकिन इन परिणामों के बाद बीजेपी आलाकमान ने मंथन की और यह पाया कि भविष्य में बेहतर परिणाम के लिए उसे इस पीडीए की स्थायी काट ढूँढ़नी होगी। पार्टी ने इस पर गंभीरता से अमल किया और बाद के चुनाव परिणामों में इसका असर दिखा भी। अब पार्टी ने उत्तर प्रदेश में इसे और जमीनी स्तर पर पहुंचाने के लिए कमर कस ली है। उसने तय किया है कि जमीनी स्तर पर संगठन में जो भी बदलाव होंगे उसमें पीडीए का ख्याल रखते हुए वर्ग विशेष का समुचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। प्रदेश संगठन में जिला और महानगर स्तर पर होने वाले अध्यक्षों के नामों के चयन में इसका बखूबी ख्याल रखा गया। इससे कोई संदेह नहीं है कि आने वाले चुनाव नतीजों में इसका और असर दिखेगा।
रविवार को उत्तर प्रदेश के 98 जिला और महानगर अध्यक्षों में से सत्तर अध्यक्षों के नामों की घोषणा की गई। जबकि अठठाईस की संखया में और घोषित होने शेष हैं। इन नामों में सामान्य, ओबीसी, एससी और महिलाओं के नामों के समायोजन पर विशेष गंभीरता बरती गई। यह जानकारी साझा करते हुए पार्टी के प्रदेश चुनाव अधिकारी डॉ महेंद्र नाथ पाण्डेय ने बताया कि
जारी सूची में ओबसी से 25, एससी से छह, सामान्य से 39 और पांच महिलाओं को जिम्मेदारी दी गई है। अभी 28 जिलाध्यों की घोषणा बाकी रह गई है। इनमे भी इन समीकरणों पर ध्यान दिया जाएगा।
इन नामों की घोषणा ने साबित कर दिया है कि सपा सुप्रीमो के पीडीए को लेकर बीजेपी कितनी गंभीर है और उसके काट के लिए ही यह प्रयोग उसके द्वारा किया गया है।

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