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औरंगजेब पर सियासत !

By Shakti Prakash Shrivastva on March 7, 2025
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                                                                            शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

समय के साथ-साथ देश में सियासत के भी रंग-रूप बदल रहे है। सियासत के रंग-रूप का मतलब यहाँ मुद्दों की बदलती परिभाषा से है। कभी देश में सियासत के लिए रोजी-रोटी, मकान-सम्मान, मंहगाई-भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे उसके आधार हुआ करते थे। लेकिन आज धर्म-जाति-क्षेत्र सहित पार्टी हित वाले सिद्धांत सियासत के मुख्य मुद्दे बनते जा रहे हैं। हालिया उदाहरण के तौर पर पिछले दिनों महाराष्ट्र के सपा विधायक अबू आजमी के बयान से पैदा हुई सियासी तूफान को ही देखें। उन्होंने मुगल शासक औरंगजेब को लेकर कुछ ऐसी टिप्पणी की जिससे उत्तर प्रदेश का सियासी पारा अचानक शूट कर गया। उत्तर प्रदेश विधानसभा के चल रहे बजट सत्र का अंतिम दिन इसकी भेंट चढ़ गया। सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने सदन में अबू आजमी के बयान पर जमकर टिप्पणी की। इस पर समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव ने भी खूब खरी-खोटी सुनाई। मतलब कि इस मुद्दे पर इन दिनों प्रदेश की सियासत खासी गरम है।

पिछले दिनों महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने मुगल बादशाह औरंगजेब को महान प्रशासक बताते हुए उसी जमकर तारीफ की थी। महाराष्ट्र के विधायक के इस टिप्पणी ने उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल पैदा कर दी। विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के अंतिम दिन विधान परिषद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा विधायक अबू आजमी को आड़े हाथों लेते हुए उसे पार्टी से निकालने की मांग तक कर दी। साथ ही चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे विधायक को यूपी भेजा जाए यूपी ऐसे लोगों का इलाज करने में देरी नहीं करता है।

मुख्यमंत्री के इस बयान पर समाजवादी पार्टी मुखिया अखिलेश यादव ने भी तल्ख पलटवार किया। उन्होंने एक्स पर बयान जारी किया कि यदि निलंबन का आधार विचारधारा से प्रभावित होने लगेगा तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और परतंत्रता में क्या अंतर रह जाएगा। हमारे विधायक हों या सांसद उनकी बेखौफ दानिशमंदी बेमिसाल है। कुछ लोग अगर सोचते हैं कि ‘निलंबन’ से सच की ज़ुबान पर कोई लगाम लगा सकता है तो फिर ये उनकी नकारात्मक सोच का बचपना है। आजाद ख्याल कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!

सदन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सपा भारत की सांस्कृतिक विरासत पर गर्व नहीं करती और अपने मूल विचारक डॉ. राम मनोहर लोहिया के सिद्धांतों से भटक गई है। उन्होंने कहा कि डॉ. लोहिया ने भारत की एकता के तीन आधार बताए थे- श्रीराम, श्रीकृष्ण और भगवान शिव, लेकिन आज सपा औरंगजेब जैसे क्रूर शासक को अपना आदर्श मान रही है। योगी ने औरंगजेब के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि उसने अपने पिता शाहजहां को आगरा किले में कैद कर पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसाया था। उन्होंने सपा नेताओं को पटना की लाइब्रेरी में शाहजहां की जीवनी पढ़ने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि शाहजहां ने औरंगजेब को कहा था कि तुम से अच्छा तो हिन्दू है जो जीते जी तो अपने बुजुर्ग मां-बाप की सेवा करता है और मृत्युपरांत वर्ष में एक बार श्राद्ध करते हुए मां-बाप को जल अर्पित करता है।

सदन में चल रही इस तरह की बहसबाजी से भारतीय लोकतंत्र पर प्रश्नचिन्ह खड़ा होने लगा है। क्योंकि भारत जैसे लोकतान्त्रिक देश में आखिर ऐसे मुद्दों को इतनी अहमियत क्यों दी जा रही है। क्यों देश में मंहगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दे गौड़ होते जा रहे है। आने वाले समय में इसे नए सिरे से पारिभाषित करना होगा।

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