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गोरखपुर के योगानन्द ने दुनिया में लहराया योग का परचम, सरकार उनकी जन्मस्थली पर बनाएगी स्मारक

By Shakti Prakash Shrivastva on June 21, 2021
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गोरखपुर, (संवाददाता)।  बहुत कम लोग जानते हैं कि पूरी दुनियां में योग का परचम लहराने वाले परमहंस योगानन्द का जन्म गोरखपुर में हुआ था। क्रिया योग को दुनियाभर में प्रचारित करने वाले योगानंद की मुताबिक  क्रिया योग ईश्वर से साक्षात्कार की एक प्रभावी विधि है, जिससे माध्यम से अपने जीवन को संवारा और ईश्वर की ओर अग्रसर हुआ जा सकता है।

परमहंस योगानंद का जन्म गोरखपुर के मुफ्तीपुर मुहल्ले में हुआ था। इनके बचपन का नाम मुकुंदलाल घोष था। 5 जनवरी सन 1893 को पैदा हुए योगानंद के पिता भगवती चरण घोष एक रेल कर्मचारी थे। आठ भाई-बहनों वाले परिवार में ये चौथे नंबर पर थे। गोरखपुर में इनके द्वारा बिताए गए आठ साल का विवरण इनके भाई सानंदलाल घोष ने अपनी पुस्तक मेजदा मे बखूबी किया है। बचपन मे योगानन्द द्वारा कई ऐसे सिद्ध प्रयोग किए गए जिसे देख उनके परिवार सहित पड़ोसी भी अचरज में पड़ जाया करते थे। योगानंद बीसवीं सदी के एक आध्यात्मिक गुरु युक्तेशवर गिरि के शिष्य थे। इन्होंने अपने जीवन के सभी कार्य पश्चिमी देशों में किया। योगानन्द प्रथम भारतीय गुरु थे। योगानंद 1920 में अमेरिका चले गए। अमेरिका में उन्होंने अनेक यात्राएं की और क्रिया योग का प्रचार-प्रसार किया। विश्व को क्रिया योग के लिए प्रेरित किया। लोगों के बीच व्याख्यान देने, लेखन तथा निरंतर विश्वव्यापी कार्य को दिशा देने में अपने जीवन को लगा दिया। परमहंस योगानन्द की पुस्तक ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी (एक योगी की आत्मकथा) किताब भी लिखी जा चुकी है। योगानन्द के इन्ही अवदानों को देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इनकी जन्मस्थली पर भव्य स्मारक बनाने का निर्णय लिया है। स्मारक में लाइब्रेरी होगी जिसमें योग और अध्यात्म से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की पुस्तकें होंगी। यहां संग्रहालय भी बनाया जाएगा। प्रदेश सरकार ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दिया है।

 

 


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