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June 24, 2026
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सियासी गेम चेंजर एक्सप्रेसवे !

By Shakti Prakash Shrivastva on January 17, 2026
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                         शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव
उत्तर प्रदेश यूं तो देश का सर्वाधिक एक्सप्रेस वाला राज्य बन गया है। लेकिन उसमें भी प्रदेश में एक ऐसा एक्सप्रेस वे बन रहा है जो सत्ताधारी बीजेपी के लिए विधानसभा चुनाव मे गेम चेंजर साबित हो सकता है। इस एक्सप्रेस वे का नाम है गंगा एक्सप्रेस वे। 6-लेन वाले 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेस वे को मेरठ से प्रयागराज के बीच बनाया जा रहा है। यह एक्सप्रेसवे देश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में से एक है। लगभग तैयार हो चुके इस एक्सप्रेस वे का उदघाटन अगले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होना संभावित है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक है ये। प्रदेश के साठ विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरने वाले इस एक्सप्रेसवे से दोनों शहरों के बीच की दूरी पूर्व की अपेक्षा लगभग छः घंटे कम हो जाएगी।
देश के प्रतिष्ठित अङ्ग्रेज़ी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर की मुताबिक इस परियोजना से न केवल आर्थिक हित सधेगा बल्कि इससे सियासी हित भी सधेंगे। क्योंकि यह एक्सप्रेस वे साठ विधानसभा क्षेत्रों में विकास का पर्याय बनेगा। इसके चलते इलाके में स्थानीय स्तर पर रोजगार का सृजन होगा।
2022 के विधानसभा चुनाव के पहले इसकी आधारशिला रखते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि यह परियोजना क्षेत्र के युवाओं के लिए नए उद्योग, नई नौकरियां और नए अवसर लाएगी। लगभग चार वर्षों में 36,230 करोड़ रुपये की लागत से पूरा हुआ यह गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ जिले के बिजौली से शुरू होकर प्रयागराज जिले के जुदापुर दंदू में समाप्त हो रहा है। इस बीच ये प्रदेश के मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ तथा प्रयागराज जिलों से गुजर रहा है। यह कुल 7,463 हेक्टेयर भूमि पर 518 गांवों को कवर करता है। ऐसी ही एक परियोजना 2007 में मायावती सरकार द्वारा तैयार की गई थी जिसकी आधारशिला बलिया में रखी गयी थी। लेकिन पर्यावरणीय मंजूरी के अभाव में यह नहीं बन सकी।
सियासत के जानकारों की मानें तो इस एक्सप्रेसवे से यात्रा समय में कमी तो आएगी ही साथ ही इससे आर्थिक विकास, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। आगामी चुनावों में बीजेपी इसे अपनी विकास की राजनीति के प्रतीक के रूप में पेश कर सकती है। मोदी सरकार की सबका साथ, सबका विकास की नीति से इसे जोड़ते हुए चुनावी रणनीति में इसे शामिल किया जा सकता है। उदघाटन के समय मतदाताओं को याद दिलाया जा सकता है कि कैसे बीजेपी ने मायावती सरकार की असफल परियोजना को पूरा किया। बीजेपी की यह रणनीति ग्रामीण मतदाताओं, किसानों और युवाओं को रिझाने में सफल हो सकती है। क्योंकि इस परियोजना से नए उद्योगों की स्थापना होगी जिससे रोजगार सृजन होगा। इस तरह यह परियोजना बीजेपी को यूपी में जहां जाति और विकास का मुद्दा ही चुनावी परिणाम तय करता है वहाँ सत्ता में बरकरार रखने में मदद कर सकती है।

 

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