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पराली : समस्या बनी समाधान, डीएम देवरिया की अनूठी पहल

By Shakti Prakash Shrivastva on November 13, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव की आवाज में रिपोर्ट सुनने के लिए आडियो बटन पर क्लिक करें।

शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

       समस्याओं का समाधान जब जमीनी प्रयास के माध्यम से तलाशा जाता है तो जटिल से जटिल समस्याओं तक का समाधान मिल जाता है। इसकी एक बानगी पराली है। वो पराली जिससे उपजी समस्या आज मानव जीवन के खतरे के रूप में देश-दुनिया में सुर्खियां बटोर रही है। उसी पराली को एक जिलाधिकारी के सिर्फ सोच आधारित प्रयास से वो मुकाम मिला कि अब वो देश-प्रदेश की डबल इंजन की सरकारों की संकल्पना को साकार करने में सहयोगी साबित हो रही है।

कहते हैं कि जब मुखिया की सोच ईमानदार और स्पष्ट हो तो उसके मातहतों में भी काम के प्रति नजरिया बदलने लगता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में ऐसा होते दिख रहा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कभी अति पिछड़े जिले के रूप में शुमार रहे जिला देवरिया के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने पराली को लेकर एक अभिनव प्रयोग अपने जिले में किया है। इससे न केवल शासन की मंशानुरूप किसानों की आय में वृद्धि हो रही है बल्कि पर्यावरण संरक्षण का मार्ग भी प्रशस्त हो रहा है। इसके तहत एक निजी कंपनी शुभम बायो एनर्जी के माध्यम से किसानों के खेतों की पराली 150 रुपया प्रति कुंतल की दर से खरीदी जा रही है। कंपनी पराली से बायो कोल का उत्पादन करेगी। इससे जहां कंपनी को अपने उत्पाद के लिए कच्चा माल मिल जा रहा है वही किसान भी न चाहते हुए खेतों में पराली जलाने की मजबूरी से बच जाएँगे। उन्हे आर्थिक लाभ हो रहा है सो अलग। देश में खेत में पराली को जलाना भारतीय दंड संहिता की धारा 188 (IPC 188) के तहत गैर कानूनी है। ऐसा करने पर न केवल 15 हजार का जुर्माना हो सकता है बल्कि 6 महीने की जेल भी हो सकती है। इस बाबत जिलाधिकारी श्री सिंह ने जिले में प्रशासन, कृषि, पशुपालन आदि विभागो के समन्वय से एक टीम भी गठित की है। इसमें किसानों को खेतों में पराली न जलाने के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। जो किसान इसके बावजूद खेतों में पराली जला रहे हैं। उन पर जुर्माना भी किया जा रहा है। पिछले दिनों एसडीएम सदर सौरभ सिंह के नेतृत्व में प्रशासन और कंपनी पदाधिकारियों की मौजूदगी में सदर तहसील क्षेत्र के रतनपुरा गाँव में किसान दयानन्द गुप्ता से 15 हजार रुपये मूल्य की 10 टन पराली की खरीद-फरोख्त की गयी। साथ ही उपस्थित गाँव वालों को पराली न जलाने की सलाह दी गयी। भाटपार रानी के बेलही गाँव में किसान अवधेश पाण्डेय और रुद्रपुर क्षेत्र के गाँव इकौना में किसान अनिल पाण्डेय से खेतों में पराली जलाए जाने पर ढाई हजार रुपया जुर्माना वसूला गया।

जिलाधिकारी के इस प्रयास की प्रदेश ही नहीं देश के अन्य हिस्सों में भी सराहना हो रही है। पराली के व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा दिये जाने के प्रति संकल्पित जिलाधिकारी श्री सिंह अपने बैठकों में भी इस बाबत सुझाव-निर्देश देते रहते हैं। ऐसे समय में जब दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक हो चुका है। एयर क्वालिटी इंडेक्स लगभग 350 से भी ऊपर पहुँच जा रहा है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की पूर्वानुमान एजेंसी सफर की मुताबिक इस PM 2.5 प्रदूषण में पराली से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी 17 से 19 के लगभग पायी जा रही है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर की सीमा से लगे चार प्रदेशों हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को नोटिस दिया है और उनसे अविलंब हालात पर व्यापक रिपोर्ट तलब की है। ऐसी स्थिति में जिलाधिकारी श्री सिंह की यह पहल राष्ट्रीय फ़लक पर असर दिखा सकती है। शासन स्तर पर इसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए जिससे कि यह प्रयास एक दिन दिल्ली-एनसीआर वासियों के लिए बेहतर प्रदूषण मुक्त वातावरण प्रदान करने में सहायक सिद्ध हो साथ ही किसानों को भी आर्थिक मजबूती प्रदान करे।

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