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पाक पर हमला अभी नहीं..

By Shakti Prakash Shrivastva on April 27, 2025
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 शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में इस सप्ताह मंगलवार को बैसरन में हुए आतंकी हमले में जिस तरह दो दर्जन से अधिक पर्यटकों को आतंकियों ने मौत के घाट उतारा था। उससे पूरा देश आज स्तब्ध है। सोशल मीडिया मंचों पर उठ रही देश की आम-अवाम की भावना को देखें तो एक ही स्वर सुनाई देता है कि बहुत हो चुका अब पाकिस्तान पर आक्रमण होना ही चाहिए। इसके लिए लोग अब और विलंब नहीं चाहते है। उनकी मुताबिक देश की तरफ से अविलब युद्ध का बिगुल फूँक देना चाहिए। लेकिन इससे मांग करने वालों के देश के प्रति लगाव मात्र का जज्बाती एहसास होता है। जबकि देश में इस तरह के मामलों के जानकारों की माने तो उनका मत है कि देश का मिजाज पाकिस्तान पर युद्ध करने को भले ही प्रेरित करता है। लेकिन क्षेत्र विशेष की नीतियों और विरोधी देश के सामरिक क्षमता को देखते हुए प्रतिक्रियात्मक कार्रवाई के लिए अपेक्षित समय का सरकार को इंतजार करना चाहिए।
चूंकि इस आतंकी हमले में देश के पर्यटकों के साथ-साथ अरब और नेपाल देशों के पर्यटक भी शामिल है। लिहाजा इस घटना पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का होना लाजिमी है। देशवासियों का गुस्सा भी जायज है क्योंकि ऐसी घटना पहले कभी देश में नहीं हुई जिसमें आतंकियों ने धर्म पूछकर निहत्थों को गोली मारी हो। सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकाल रहे व्यथित लोगों की तो बस यही दिली इच्छा है कि अविलंब पाकिस्तान को एन-केन प्रकारेण हमला कर नेस्तनाबूनद कर दिया जाए। सेना से अवकाशप्राप्त सैन्य अधिकारियों की मुताबिक नए राष्ट्रवाद से भरा देश भी खून की मांग कर रहा है। लेकिन रक्षा मामलों के जानकारों की राय है कि पाकिस्तान के खिलाफ कोई भी कार्रवाई जल्द बाजी में नहीं की जानी चाहिए। वरना जल्दबाजी में लिया गया कोई निर्णय देश के लिए नुक्सानदेह साबित हो सकता है।
हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान एक परमाणु हथियारों वाला देश है और उसके पास भारत के सीमित सैन्य हमलों का जवाब देने की ताकत है। भारत के पास मिसाइल, ड्रोन या नौसेना की ताकत के मामले में ऐसी कोई खास तकनीक नहीं है जिससे वह पाकिस्तान पर आसानी से पार पा सके। ऐसे में पाकिस्तान भी जवाबी कार्रवाई कर सकता है और भारत को इसके लिए भी तैयार रहना चाहिए।
जानकारों के सुझाव की मुताबिक कुछ ऐसे सैन्य विकल्प हैं जिसपर विचार किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर फायरिंग करना, स्पेशल फोर्स से हमला करवाना और नियंत्रण रेखा पार करके दुश्मन की पोस्ट पर कब्जा करना आदि। इसके अलावा भारत परमाणु हथियारों के प्रयोग पर एहतियात बरतते हुए जम्मू-कश्मीर तक सीमित एक छोटा और तेज सैन्य अभियान चला सकता है। पहाड़ों पर बर्फ के पिघलने के बाद इस तरह के अभियान को शुरू करना बेहतर साबित हो सकता है। पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाने के लिए भारत नियंत्रण रेखा को 10-15 किमी पीछे धकेलने का प्रयास भी कर सकता है। इससे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा भी खतरे में आ सकता है। ऐसी स्थिति आने पर पाकिस्तान शांतिवार्ता करने को मजबूर हो सकता है।
इसलिए देशहित में होशियारी यही है कि जनता के गुस्से या राजनीतिक फायदे के लिए जल्दबाजी में युद्ध करने की बजाय सोची-समझी रणनीति के साथ निर्णायक हमला किया जाए।

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