नई दिल्ली(एजेंसी)- भारत सरकार ने देश के 80 करोड़ से अधिक गरीब लोगों को मई-जून 2021 के लिए पांच-पांच किलो मुफ्त अनाज देने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्य योजना के तहत मिलने वाला यह अनाज कोरोना संकट के दौर में उन्हें भुखमरी से बचाने में मदद कर सकता है।कोरोनावायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए कई राज्य अपने यहां सख्त कदम उठा रहे हैं।इस वजह से देश के बड़े शहरों से एक बार फिर प्रवासी मजदूरों का पलायन शुरू हो चुका है। केंद्र सरकार को यह डर है कि राज्यों में हुई सख्ती की वजह से कामकाज ठप होने पर पलायन कर अपने घर पहुंच रहे लोगों के सामने खाने पीने के सामान की दिक्कत हो सकती है।इस वजह से उन्हें अनाज उपलब्ध कराया जाना जरूरी है।केंद्र सरकार की इस योजना के तहत ₹26000 करोड़ से अधिक की रकम खर्च हो सकती हैं।
पिछले साल लागू हुई थी योजना
पिछले साल कोविड-19 की पहली लहर के दौरान मार्च में जब पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया था तब इस योजना का ऐलान हुआ था। यह येाजना प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज का हिस्सा थी। उस वक्त गरीब परिवारों को राहत देने के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत सरकार ने 80 करोड़ से अधिक राशनकार्ड धारकों को अप्रैल, मई और जून 2020 के लिए राशन कार्ड में दर्ज सदस्यों के आधार पर प्रति व्यक्ति पांच किलो अनाज (गेहूं अथवा चावल) और प्रति परिवार एक किलो दाल मुफ्त देने की घोषणा की थी।यह मुफ्त 5 किलो अनाज, राशन कार्ड पर रहने वाले अनाज के कोटे के अतिरिक्त घोषित किया गया था। बाद में सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का विस्तार दिवाली और छठ पूजा तक कर दिया था। अब सरकार ने एक बार फिर प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को लागू किया है।पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे समय में जब देश कठिन दौर से गुजर रहा है तब गरीबों को पूरा सपोर्ट मिला। इस योजना पर सरकार के 26 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। कई राज्य भी केंद्र सरकार से आर्थिक पैकेज की मांग कर रहे हैं। शुक्रवार को भी सीएम के साथ मीटिंग में कई मुख्यमंत्रियों ने यह मांग की थी। दरअसल, कोविड से बचाव के लिए कई राज्यों ने अपने यहां लॉकडाउन लगा दिया है। हालांकि पीएम मोदी ने राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन से इनकार किया है और राज्यों से भी इसे अंतिम हथियार के रूप में ही लागू करने को कहा है।