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यात्रा ने बढ़ाई कांग्रेस-सपा की सिमटती दूरियाँ !

By Shakti Prakash Shrivastva on October 31, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

                               उत्तर प्रदेश के घोसी विधानसभा उपचुनाव में सपा को मिली जीत के बाद उपजे हालात ने सपा को कांग्रेस से दूर करने का काम किया हैं। हालांकि ये दोनों ही दल विपक्षी पार्टियों के नवगठित गठबंधन आई एन डी आई ए के अहम घटक हैं। इसमें कही कोई संशय नहीं है कि ये दोनों ही दल उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के लिए स्थापित सियासी समीकरणों को बदलने की क्षमता रखते हैं। लेकिन कहते हैं न कि सियासत है यहाँ कुछ भी स्थायी नहीं होता है। न दोस्त और न ही दुश्मन। हालांकि इन दोनों ही दलों के बीच लगातार बढ़ रही दूरियों को सिमटाने का काम कांग्रेस के शीर्षस्थ नेताओं ने किया। उसका असर भी दिखा। क्या कमलनाथ, दिग्विजय या क्या प्रो. रामगोपाल यादव सभी के सभी ने हालात से समझौता करते और वक्त की नजाकत को समझते हुए बीच का रास्ता निकाला और हुई घटनाओं को भूलने का रुख अख्तियार किया। काफी हद तक स्थितियाँ कंट्रोल में होती दिखने भी लगीं। लेकिन जबसे सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यकों को साधने के लिए पीडीए यात्रा निकाली। इसके बाद से फिर दोनों ही दलों के बीच खटास बढ़ने जैसे हालात बनने लगे हैं। क्योंकि अखिलेश यादव अपने पीडीए यात्रा के जरिए प्रदेश में उन्ही मतदाताओं को रिझा रहे है जिन्हे रिझाने के लिए कांग्रेस नए सिरे से ताना-बाना बुन रही है।

उदाहरण के तौर पर कांग्रेस ने पिछले दिनों अल्पसंख्यक मुस्लिम नेताओं को जिस तरह और तेजी से अपने साथ जोड़ने का काम किया है उससे सपा नेताओं को जैसे सांप सूंघ गया है। क्योंकि प्रदेश के अल्पसंख्यकों के बारे में सपा का स्पष्ट मत है कि ये उनका वोटबैंक हैं। लेकिन सपा को अब स्थितियाँ पहले की तुलना में बदलते दिख रही हैं। यही वजह है कि सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यकों को साधने के लिए पीडीए यात्रा शुरू कर दी। इस यात्रा ने प्रदेश की सियासत से लेकर राष्ट्र तक की सियासी गलियारों में अलग तरीके का संदेश देने का काम किया है। सियासी जानकारों का स्पष्ट मानना है कि भले ही अखिलेश की यह पीडीए यात्रा सत्ता पक्ष के खिलाफ और अपने पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुँचने के लिए निकाली गई है लेकिन इसके निहितार्थ बहुत ही गूढ और सियासी है। अखिलेश की यह पीडीए यात्रा इन दिनों उत्तर प्रदेश के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजर रही है। समाजवादी पार्टी के नेताओं के मुताबिक पार्टी की यह यात्रा उनके चुनावी एजेंडे और उत्तर प्रदेश में आने वाले लोकसभा के चुनावों की मजबूती के लिहाज से शुरू की गई है। लेकिन राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस यात्रा के माध्यम से समाजवादी पार्टी ने एक साथ कई संदेश दे दिए हैं। सपा का यह सियासी संदेश सिर्फ बीजेपी के लिए ही नहीं बल्कि कांग्रेस के लिए स्पष्ट संदेश देते दिख रहे हैं।

सियासी घटनाक्रम के मुताबिक कांग्रेस लगातार समाजवादी पार्टी के गढ़ में सेंधमारी करने की जुगत में है। जहां के मुस्लिम सपा के कोर वोट बैंक है। जबकि इस बाबत कांग्रेस का यह मानना है कि समाजवादी पार्टी के साथ जो भी वोट बैंक जुड़ा है वह कभी कांग्रेस का ही वोट होता था। इसलिए कांग्रेस मुसलमानों से लेकर दलित और पिछड़ों की सियासत में आगे बढ़ रही है। हालांकि इन सबसे बेपरवाह अखिलेश यादव पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यकों के माध्यम से न सिर्फ उत्तर प्रदेश की सियासत बल्कि आने वाले लोकसभा के चुनाव में अपनी मजबूत सियासी  नींव रख रहे हैं। सियासी जानकार मानते है कि गठबंधन के बावजूद भी दोनों दलों के बड़े नेताओं को छोड़ दिया जाए, तो निचले स्तर पर जमकर तनातनी चल रही है। ऐसे में सपा और कांग्रेस के बीच जो तल्खी या दूरियाँ काफी हद कम हो रही थी वो अखिलेश की इस यात्रा से दुबारा बढ़ गई है।

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