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झांसी : वाह रे कमिश्नर साहब …काश सभी ऐसा करते

By Shakti Prakash Shrivastva on June 15, 2021
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झाँसी, (संवाददाता)। कहते हैं माता-पिता और परिवार से मिला संस्कार इंसान के व्यक्तित्व में स्पष्ट झलकता है। ऐसा ही कुछ संस्कार, कुलीन ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखने वाले आईएएस अधिकारी और झाँसी मण्डल के कमिश्नर डॉ अजय शंकर पाण्डेय में भी दिखता है। रोजाना समय से पहले आफिस पहुँचना और अपने कमरे की सफाई स्वयं करना इनकी दिनचर्या में शामिल है। इतना ही नहीं अपने मिलने-जुलने वालों से भी डॉ पाण्डेय आफिस को साफ-सुथरा रखने में सहयोगी बनने की गुजारिश करते हैं। आगंतुकों के लिए इनके कमरे के बाहर लगा बोर्ड, लोगों को यह कहने पर मजबूर कर देता है कि वाह रे कमिश्नर साहब…..काश ऐसा सभी करते।

डॉ पाण्डेय एक ऐसे ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते हैं जिसके हर सदस्य में परिवार का ऐसा संस्कार है जो अमूमन देखने मे कम मिलता है। इनके परिवार में एक भाई विजय शंकर पाण्डेय (चर्चित अवकाश प्राप्त आईएएस अधिकारी) का नाम उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में किसी परिचय का मोहताज नहीं है, वहीं एक बहन कनक त्रिपाठी (आईएएस अधिकारी) पिछले दिनों आजमगढ़ में कमिश्नर के रूप में चर्चित रहीं। एक भाई संजय शंकर पाण्डेय (न्यायिक अधिकारी) का भी अपने संवर्ग में पहचान है। जहां तक अजय शंकर पाण्डेय की बात है ये जहां भी रहे अपने कार्यशैली और कार्य व्यवहार से कुछ न कुछ ऐसा करते रहे हैं जो अन्य के लिए मिसाल बनता रहा है। गाजियाबाद में जिलाधिकारी के रूप में कोरोना के बिगड़े हालात को जिस तरह से इन्होने नियंत्रित किया उसकी खूब तारीफ हुई। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जो स्वयं इनके गोरखपुर में बतौर नगर आयुक्त किए गए कामकाज से प्रभावित रहे हैं, उन्होंने भी इनकी सराहना की। वहाँ से ट्रांसफर हो कर कमिश्नर झांसी बने डॉ. अजय शंकर पाण्डेय पहले दिन से ही अपनी दिनचर्या की मुताबिक आफिस की सफाई करने लगे, और आफिस के बाहर आने-जाने वालों के लिए एक बोर्ड लगवा दिया जिसमें आने-जाने वालों से स्वच्छता संबंधी अपील की गयी है। यह इन दिनों झाँसी मण्डल के इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। इनकी कार्यशैली से प्रभावित लोगों का कहना है कि काश ऐसे ही सभी अधिकारी हो जाते। अपना काम स्वयं करने की आदत डॉ पाण्डेय की दिनचर्या में शामिल है। डॉ पाण्डेय का मानना है कि स्वच्छता सरीखे कार्यों के संबंध में मेरे अधीनस्थों के ऊपर इसे लेकर कोई अनिवार्यता नहीं है। लेकिन यदि कोई इस पहल से प्रेरित होकर सफाई करता है तो यह निश्चित रूप से स्वागत योग्य है।


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