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यूपी विधानसभा उपचुनाव : राहत में बीजेपी !

By Shakti Prakash Shrivastva on September 25, 2024
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

उत्तर प्रदेश में विधानसभा की दस सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव में बीजेपी को बड़ी राहत मिलने की संभावना है। क्योंकि उपचुनाव में बीजेपी को अगर किसी तरह की चुनौती कोई दल देने की स्थिति में है तो वो है सपा-कांग्रेस गठबंधन। लेकिन सियासी गलियारों में तैरती जानकारियों पर गौर करें तो लगता है कि इन उपचुनावों में खासकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी एकजुट होकर लड़ने की बजाय अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरें। फिलहाल यह खबर अगर सही है तो इससे सबसे बड़ी राहत बीजेपी को मिलते दिख रही है।

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच बढ़ती खाई की वजह बन रहा है महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा के चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस द्वारा सपा को सीटें न दिया जाना। क्योंकि समाजवादी पार्टी का फिलहाल यूपी में भविष्य बेहतर माना जा रहा है। काँग्रेस आइएनडीआईए गठबंधन के तहत यूपी में होने वाले उपचुनावों में कुछ सीटे कांग्रेस से मांग रही है। समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव काँग्रेस को एक भी सीट दिए जाने के पक्षधर नहीं है। अखिलेश यादव का मानना है कि अगर विपक्षी दलों का गठबंधन के तहत अगर यूपी में काँग्रेस सीटें चाहती है तो यही फार्मूला हरियाणा और महाराष्ट्र में क्यों नहीं लागू करती है। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में ठीक-ठाक सीटों पर दावेदारी कर रहे हैं। लेकिन कांग्रेस इस बाबत मौन है। सपा से जुड़े रणनीतिकारों का भी मानना है कि काँग्रेस के साथ किया जाने वाला गठबंधन या समझौता के दूरगामी परिणाम सपा के लिए बेहतर नहीं होगा।      ।

यूपी में 10 विधानसभा सीटों करहल, सीसामऊ, मिल्कीपुर, कटेहरी, कुंदरकी, खैर, गाजियाबाद, फूलपुर, मझवां और मीरापुर में उपचुनाव होने हैं। कांग्रेस इनमें से पांच सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छुक है। इस बारे में कांग्रेस ने अपना प्रस्ताव भी सपा नेतृत्व के सामने रख दिया है। सपा ने हरियाणा के विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के तहत कांग्रेस से दो सीटें मांगी थीं। लेकिन, कांग्रेस की हरियाणा इकाई सपा को कोई भी सीट न देने पर अड़ गई। कांग्रेस हाईकमान से भी कई बार की वार्ता के बाद बात नहीं बनी। उससे पहले यही स्थिति मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में हो चुकी है।

सपा सूत्रों का कहना है कि जब अपने प्रभाव वाले राज्यों में कांग्रेस, सपा के साथ साझेदारी के लिए तैयार नहीं है, तो यूपी में भी कांग्रेस का कोई जनाधार नहीं है। पिछले विधानसभा चुनाव में उसे महज दो सीटें मिली थीं। अधिकतर सीटों पर उसकी करारी हार हुई थी। इसलिए सपा नेतृत्व ने चुनाव वाले सभी 10 जिलों के अपने पार्टी संगठन को तैयारी में जुट जाने के लिए कह दिया गया है। परिस्थितियाँ चुगली कर रही है कि दोनों दलों के एकजुट होने की संभावना फिलहाल नहीं दिख रहा है।

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