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एक सीट पर पेंच, टूटेगा सपा-रालोद गठबंधन!

By Shakti Prakash Shrivastva on January 21, 2024
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव का समय नजदीक आ रहा है सियासी दलों में सरगर्मिया बढ्ने लगी हैं। सभी दल अपने-अपने प्रत्याशियों की सूची फाइनल करने के साथ-साथ अपनी मजबूती के लिए दूसरे दलों से गठबंधन करने की कवायद में जुटे हुए हैं। इसी तरह उत्तर प्रदेश में चुनावी वैतरणी पार करने के लिए राष्ट्रीय लोक दल और समाजवादी पार्टी ने एक गठबंधन बनाया है। सियासी सूत्रों की माने तो नए बने इस गठबंधन में समाजवादी पार्टी ने रालोद को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सात सीटें दी है। इन सात सीटों में अधिकांश पर रालोद और कुछ सीटों पर रालोद के सिंबल पर सपा के उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतर सकते है। लेकिन इसमें भी एक सीट को लेकर दोनों दलों में घोर असहमति है। वो सीट है मुजफ्फरनगर की जहां पर रालोद के सिंबल पर सपा उम्मीदवार उतारने पर रालोद हाइकमान राजी नहीं है। इसको लेकर ही दोनों दलों में टकराव की स्थिति बन सकती है। हालांकि ये सियासत है यहाँ होते-होते बहुत कुछ नहीं होता है। इसलिए कुछ कहा नहीं जा सकता कि क्या होगा। यदि टकराव बढ़ा तो शुक्रवार को अमल में आया दोनों दलों के बीच सीटों का बंटवारा बेमानी हो सकता है।

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर रालोद और समाजवादी पार्टी ने आपसी सामंजस्य के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। इस बाबत शुक्रवार को बाकायदा दोनों दलों के बीच सीटों को लेकर आपसी सहमति भी बन गयी। सात सीटें रालोद के हिस्से देने पर सहमति बनी लेकिन मुजफ्फरनगर की एक सीट को लेकर पेंच फंस गया है। यहाँ की सीट पर दावेदारी को लेकर दोनों दलों में असहमति है। यह भी संभव है कि मुजफ्फरनगर सीट पर सपा अपने ही सिंबल पर प्रत्याशी उतारे और बिजनौर सीट रालोद के हिस्से में दे दे। इसी वजह से अंतिम फैसला नहीं हो सका। रालोद के हिस्से की सात सीटों में दो से तीन सीटों पर सपा प्रत्याशी के उतरने की संभावना है।

बागपत और मथुरा में रालोद के प्रत्याशी ही मैदान में उतरेंगे। नगीना सीट पर विचार इसलिए नहीं हुआ क्योंकि यह सीट आसपा अध्यक्ष चन्द्रशेखर के लिए छोड़ी जा सकती है। 2019 के लोकसभा चुनाव में रालोद ने मुजफ्फरनगर, बागपत और मथुरा से चुनाव लड़ा था लेकिन इन तीनों ही सीटों पर उसे  हार का सामना करना पड़ा था। रालोद और सपा ने विधानसभा चुनाव में भी सिंबल पर सहमति बनाने के बाद प्रत्याशी बदल लिए थे। यही वजह है कि मीरापुर से चौहान और पुरकाजी से अनिल कुमार रालोद के टिकट पर चुनाव जीते थे। इस बार भी कुछ सीटों पर ऐसा ही फार्मूला अपनाने की तैयारी है। रालोद की तरफ से टिकट की दावेदारी करने वालों मे शामली के विधायक प्रसन्न चौधरी, रालोद विधानमंडल दल के नेता राजपाल बालियान, पूर्व मंत्री योगराज सिंह, पूर्व विधायक चंद्रवीर सिंह की बेटी मनीषा अहलावत के नाम प्रमुख है। रालोद सुप्रीमो जयंत चौधरी यदि चुनाव लड़ते है तो उनके लिए बागपत से बेहतर विकल्प मुजफ्फरनगर को बताया जा रहा हैं। हालांकि उनकी पत्नी चारू चौधरी को भी प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चा है। लेकिन अंतिम तस्वीर चुनाव नजदीक आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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