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इजहार में भी तकरार!

By Shakti Prakash Shrivastva on October 28, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

                        देश में इस बार यानि 2024 का लोकसभा चुनाव खासा दिलचस्प होने वाला है। क्योंकि पहली बार देश की सभी विपक्षी पार्टियों ने मिलकर सत्तारूढ़ सरकार को अपदस्थ करने के लिए एक महागठबंधन बनाया है। इस नए गठबंधन का नाम इंडियन नेशनल डेवेलपमेंटल इंकलूसिव एलायन्स रखा गया है। शार्ट में इसे इंडिया कहा जा रहा है। इसको भी लेकर मुद्दा बनाया गया मामला कोर्ट तक पहुंचा कि इंडिया नाम नहीं होना चाहिए। लेकिन चूंकि यह एक शब्द नहीं बल्कि शब्दों का संक्षिप्त नाम है। लिहाजा विरोध का कोई खासा प्रभाव नहीं हुआ। लेकिन इससे यह बात जरूर स्थापित हो गई कि सियासत में अब बाल की खाल निकालने का काम शुरू हो गया है। हाल के दिनों में यह देखने में आ रहा है कि सियासी दलों में बेवजह मुद्दा बनाने की होड़ बनती जा रही है। अभी हाल ही में लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के कार्यालय के सामने लगा एक पोस्टर, सियासी गलियारे में खासी सुर्खियां बटोर रही है। सपा कार्यकर्ता की तरफ से लगे इस होर्डिंग में सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव को देश का भावी प्रधानमंत्री बनने की शुभकामनाएं दी गई हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी कार्यालय के बाहर एक पोस्टर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लगाया जिसमें 2024 में राहुल और 2027 में राय लिख आगे लिखा गया है कि देश-प्रदेश बोल रहा है हाथ के साथ आयें। मतलब साफ है कि 2024 में राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेगे और 2027 विधानसभा चुनाव में अजय राय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे। लेकिन शुभकामनाओं और कार्यकर्ताओं की इन भावनाओं के इजहार पर भी सियासी तकरार शुरू हो गई है। प्रतिक्रिया में बीजेपी ने इसे मुंगेरी लाल के हसीन सपने करार दिया।

सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि जब से इंडिया गठबंधन बना है, सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता चाहते हैं कि उनकी पार्टी का नेता प्रधानमंत्री बने। जैसा कि इंडिया गठबंधन में हमारे नेताओं ने कहा है, पहले हम गठबंधन की सरकार बनाएंगे, और पीएम कौन होगा, हम चर्चा से तय करेंगे। लखनऊ में पार्टी कार्यालय के बाहर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को “भावी प्रधानमंत्री” घोषित करते हुए जो पोस्टर लगा है। इसको लेकर सियासी बवाल मच गया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच जारी तनातनी के दौरान ही यह पोस्टर लगा है। यही कारण है कि इंडिया गठबंधन को लेकर भी चर्चा होने लगी है। इन सब के बीच अखिलेश यादव ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सिर्फ पोस्टर लगाने से कोई प्रधानमंत्री नहीं बनने वाला. अगर किसी समर्थक ने पोस्टर लगाया है तो वह जो चाहता है, वही जाहिर कर रहा है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि समाजवादियों का लक्ष्य बीजेपी को रोकना है। दूसरी ओर बीजेपी सपा पर हमलावर हो गई है। बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने कहा कि आई एन डी आई ए गठबंधन एक अनोखा गठबंधन है, इसका देश के लिए कोई मिशन और विजन नहीं है, इसमें केवल भ्रम, विरोधाभास और महत्वाकांक्षा की प्यास है… पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी मध्य प्रदेश में सीटों को लेकर लड़ रही थीं. ..अब वे पीएम पद के लिए लड़ रहे हैं जबकि पीएम पद के लिए कोई वैकेंसी नहीं है, कभी कांग्रेस राहुल गांधी का चेहरा आगे बढ़ाती है, कभी टीएमसी ममता बनर्जी का चेहरा आगे बढ़ाती है, तो अखिलेश यादव और नीतीश कुमार का चेहरा भी आगे बढ़ाया जा रहा है, कितने पीएम उम्मीदवार होंगे?

बीजेपी नेता दानिश आजाद अंसारी ने इसे ‘मुंगेरी लाल के हसीन सपने’ बताया। उन्होंने कहा कि दिवास्वप्न देखने से कोई किसी को नहीं रोक सकता। लेकिन व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार ही सपने देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में हमारा देश विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। देश की जनता को पीएम मोदी पर भरोसा है और देश निश्चित तौर पर तीसरी बार पीएम मोदी को पीएम चुनेगा. सपा कार्यालय के बाहर लगा पोस्टर सपा नेता फखरुल हसन चांद ने लगवाया है। चांद ने कहा कि पोस्टर का उद्देश्य समाजवादी पार्टी प्रमुख के प्रति प्यार और सम्मान व्यक्त करना था। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता चाहते हैं कि अखिलेश यादव देश के प्रधानमंत्री बनें…भारत गठबंधन में हम चाहते हैं कि अखिलेश यादव प्रधानमंत्री का चेहरा बनें। दूसरी तरफ कांग्रेस कार्यालय के सामने लगा पोस्टर कार्यकर्ता ठाकुर एन सिंह नितिन की तरफ से लगाया गया है। इन दोनों पोस्टर के बाद अब तल्खी कांग्रेस और सपा में बढ़ गई है। इन दोनों की तल्खी के बीच बीजेपी किनारे हो गई है। पोस्टरों पर छिड़ी इस तकरार का असर विपक्षी दलों के नए बने गठबंधन पर पड़ना तय है।  अब देखना दिलचस्प होगा कि इसका कितना असर विधानसभा और लोकसभा चुनाव में पड़ता है।

 

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