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बिखर जाएगा विपक्षी गठबंधन !

By Shakti Prakash Shrivastva on September 30, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

                              देश में दस साल यानि दो लोकसभा अवधि तक लगातार सत्ता में काबिज रहने वाली बीजेपी को इस बार सत्ता से बेदखल करने की विपक्षी दलों ने तैयारी कर ली है। इसके लिए देश के लगभग ढाई दर्जन राजनीतिक दलों के नेताओं ने आपसी बैर-भाव भुलाकर एक सियासी गठजोड़ बनाया है। इसे इंडियन नेशनल डेवेलपमेंटल इंकलूसिव एलायन्स यानि आईएनडीआईए नाम दिया गया है। सत्ताधारी बीजेपी समेत उसके गठबंधन के सहयोगी इस गठबंधन को मौका परस्त गठबंधन मानते हैं। सत्ता की सहयोगी दल लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास)के अध्यक्ष और सांसद चिराग पासवान तो इस गठबंधन के बारे में बड़े भरोसे के साथ ऐलान करते हैं कि यह गठबंधन लोकसभा चुनाव के पहले ही बिखर जाएगा। उन्होने इस गठबंधन को भानमती का कुनबा करार देते हुए कहा है कि ये ऐसा कुनबा है जो बनने से पहले बिखर जाएगा। क्योंकि इनके दलों में विचारों की साम्यता नहीं है बल्कि गठबंधन सहयोगियों का एकमात्र उद्देश्य है बीजेपी को सत्ता से उखाड़ फेंकना है। इसके अलावा इन दलों के दर्जन भर नेताओं के सपने प्रधानमंत्री बनने की है। लिहाजा जब समय नजदीक आएगा तो सपने को हकीकत में बदलने की कवायद में इनके बीच आपसी दुराव होगा और कुनबा अपने आप ही बिखर जाएगा।

उत्तर प्रदेश के बलिया में आयोजित अतिदलित महासम्मेलन में बतौर अतिथि शिरकत कर रहे चिराग पासवान ने यह बयान दिया। उन्होने कहा कि इसके पहले 2014 और 2019 में भी देश ने इन विपक्षियों का ऐसा व्यवहार देखा है। सभी को अच्छी तरह मालूम है कि दर्जन भर प्रधानमंत्री पद के दावेदारों की मौजूदगी में गठबंधन की उम्र का लंबा होना संभव ही नहीं है। गठबंधन की तीन-तीन अहम बैठकें होने के बावजूद अभी तक गठबंधन के संयोजक के नाम पर मुहर नहीं लग सकी है। क्योंकि गठबंधन के इच्छुक नेताओं को यह मालूम है कि नाम की घोषणा होते ही संभव है कि आपस में तल्खी बढ़ जाये। शुरुआती इमेज बिल्डिंग के दौरान गठबंधन में शामिल हर नेता यही चाहता है कि किसी भी तरह से आपसी मनमुटाव को बाहर नहीं लाया जाये। बाहर आते ही बीजेपी इसे अपने ढंग से परोसना शुरू कर देगी। ऐसे में गठबंधन के नेताओं के व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के चलते ही इस गठबंधन को अधोगति को प्राप्त होना स्पष्ट झलक रहा है। विपक्षी दलों के इसी चरित्र के आधार पर पासवान को इत्मीनान है कि यह गठबंधन लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने तक अलग-थलग हो जाएगा। इसके नेता अपने-अपने हितों की रक्षा के लिए तब तक वाजिब ठौर तलाश चुके होंगे। उन्होने पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे सूबे का उदाहरण देते हुए कहा कि यहाँ तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव अपने प्रभाव वाले राज्य में एक सीमा से अधिक गठबंधन का दखल हरगिज बर्दाश्त नहीं करेंगे। ऐसे में देशव्यापी गठबंधन का सबसे मजबूत घटक कांग्रेस पार्टी को ही ये दोनों दल नीचा दिखने का प्रयास करेंगे। ऐसे में कांग्रेस का इन दलों के सामने समर्पण किया जाना संभव नहीं है। जैसा कि उत्तर प्रदेश के नवनियुक्त कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने सपा को उत्तराखंड में हुए विधानसभा उपचुनाव की हार के लिए दोषी ठहराया था। जिस तरह से सपा को दोषी मानते हुए बयान दिया गया वो कहीं से गठबंधन धर्म का अनुपालन करते नहीं दिखता है। ऐसे में गठबंधन में शामिल दलों का चरित्र देखते हुए इत्मीनान से कहा जा सकता है कि यह गठबंधन बहुत जल्द बिखर जाएगा।

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