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आखिर क्यों…’शूटर’ ने कर दिया सरेंडर !

By Shakti Prakash Shrivastva on April 6, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

गणतन्त्र दिवस से ठीक एक दिन पहले प्रयागराज की सड़कों पर दिन दहाड़े दौड़ा-दौड़ा कर गोलियों की बौछार कर बीएसपी विधायक राजूपाल की हत्या की गई थी। यह वाकया आज से लगभग अठारह साल पहले 25 जनवरी 2005 की है। उस समय माफिया सरगना अतीक अहमद, उसका माफिया भाई अशरफ और शूटर अब्दुल कवि समेत कुछ लोगो पर मुकदमा दर्ज हुआ था। और लोग तो पुलिस की गिरफ्त में आ गए लेकिन शूटर अब्दुल कवि तब से आज लगभग अठारह साल तक पुलिस और सीबीआई की आँखों में धूल झोंकता हुआ फरार चल रहा था। अचानक बुधवार को शूटर अब्दुल कवि ने लखनऊ के स्पेशल सीबीआई कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। किसी के समझ नहीं आया कि आखिर क्या हुआ जो कवि स्वयं ही समर्पण कर दिया। इसके पीछे की कहानी हम बताते हैं। हुआ ये कि प्रयागराज में पूर्व विधायक राजूपाल की हत्या के मुख्य गवाह रहे उमेश पाल व उनके दो सरकारी सुरक्षाकर्मियों की जब 24 फरवरी को दिन दहाड़े बम और गोलिया मारकर हत्या कर दी गयी। तब पुलिस और एजेंसियों ने माफिया अतीक और अशरफ के साथ-साथ इसके खिलाफ भी ताबड़तोड़ कार्रवाइयाँ शुरू की।

पुलिसिया कार्रवाई की जद में अब्दुल कवि का न केवल करोड़ों करोड़ का आर्थिक साम्राज्य जमीडोज़ हुआ बल्कि उसे इस बात का इतमीनान हो गया कि अब उसका इनकाउंटर भी हो जाएगा। क्योंकि इस दौरान जिस किसी से भी पुराने रिश्ते की दुहाई देते हुए उसने मदद की गुहार लगाई। सभी ने हाथ खड़े कर दिये। तब जाकर कवि को लगा कि आत्मसमर्पण न करने पर उसकी जान को खतरा है। और अंततः उसने पुलिस को चकमा देते हुए सीबीआई कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। राजू पाल हत्याकांड की जांच कर रही सीबीआई ने सरायअकिल के भखंदा निवासी माफिया अतीक के शूटर अब्दुल कवि के घर पर 14 फरवरी को कुर्की का नोटिस भी चस्पा किया था। बाद में 24 फरवरी को जब उमेश पाल की हत्या हो गई। इसके बाद जांच एजेंसियों को तफतीश में पता चला कि घटना में शामिल शूटरों ने अब्दुल कवि के घर में शरण लिया था। फिर ताबड़तोड़ कार्र्वाइयान शुरू हो गई। तलाशी के दौरान अब्दुल कवि या अन्य कोई शूटर तो नहीं मिले लेकिन दीवारों में छिपाकर रखे गए पांच नाजायज असलहे, देशी बम, चापड़ व चाकू आदि पुलिस ने इसके घर से बरामद किए। इसके घर को बुलडोजर से ज़मींदोज़ कर दिया गया। अब्दुल कवि समेत 11 सदस्यों के खिलाफ गंभीर धारा में मुकदमा दर्ज किया गया। घटना में शामिल रहे अब्दुल कवि के भाई अब्दुल कादिर को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया। इस दौरान पुलिस ने फरार शूटर पर घोषित इनाम 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख कर दिया। इसके बाद से ही शूटर अब्दुल कवि अपनी जान बचाने की जुगत में लग गया और अंततः सीबीआई की शरण में जा पहुंचा।

 

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