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कुछ तो है अखिलेश के ‘करहल’ और योगी के ‘गोरखपुर’ में

By Shakti Prakash Shrivastva on January 23, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

               उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की दुदुंभी बज चुकी है। राजनीतिक दलों के तरकस से तलवारें भी निकल चुकी हैं। पक्ष और विपक्ष आमने-सामने है। सात चरणों में होने वाले चुनाव में पार्टियां चरणबद्ध तरीके से अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणाएँ कर रही हैं। अभी तक चुनावी रण की जो तस्वीरें सामने आ रही है। उनमे मुख्य लड़ाई बीजेपी और सपा गठबंधन के बीच ही होते दिख रही है। इनमे दोनों ही दलों के अगुवा यानि बीजेपी के योगी आदित्यनाथ और सपा के अखिलेश यादव ने भी क्रमशः प्रदेश के पूरब और पश्चिम की सीटों से अपनी प्रत्याशिता कर दी है। योगी आदित्यनाथ ने जहां अपने गढ़ गोरखपुर को चुना है वही अखिलेश यादव ने मैनपुरी के करहल विधानसभा से चुनाव लड़ने की घोषणा की है। ये दोनों ही विधानसभा क्षेत्र मुख्यमंत्री पद के इन दोनों दावेदारों के लिए सबसे मुफीद मानी जा रही है। गोरखपुर विधानसभा क्षेत्र बीजेपी के लिए या ये कह लें योगी आदित्यनाथ के लिए पूरे प्रदेश में सर्वाधिक सुरक्षित सीट मानी जा सकती है। क्योंकि पिछले 33 वर्षों से इस क्षेत्र पर बीजेपी का कब्जा है। जब प्रदेश के अन्य सीटों पर अलग-अलग पार्टियों की लहर के नाते जीत होती थी तब भी यह क्षेत्र बीजेपी के ही खाते में रहती थी। इसी वजह से अयोध्या या मथुरा की चर्चा होने के बावजूद योगी के लिए सबसे सुरक्षित इसे ही माना गया। इसी तरह समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव के लिए आजमगढ़ आदि क्षेत्रो से लड़ने की खबरों के बीच अंततः मैनपुरी जिले के करहल विधानसभा सीट का ही चयन किया गया। इस क्षेत्र में मुस्लिम और यादव जातियों के समीकरण के लिहाज से यहाँ अखिलेश की विजय सुनिश्चित है। इलाके की पिछड़ी जातियो का भी समीकरण इनके लिए मुफीद है।  इस क्षेत्र में करीब 3 लाख 71 हजार वोटर हैं। इसमें यादव वोटरों की संख्या लगभग 1 लाख 44 हजार है। मतलब कुल वोटर्स का 38 परसेंट वोट सिर्फ यादवों का है। इसके साथ 5 फीसदी यानी 20 हजार वोट मुस्लिम है। सपा की पैठ का अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि यहां पिछले चुनाव में कुल 5 में से 4 सीटें समाजवादी पार्टी के खाते में आई थीं। मैनपुरी, करहल व किशनी सीटों में यादव मतदाता ज्यादा हैं, जबकि क्षत्रिय मतदाता दूसरे नंबर पर हैं। भोगांव में लोधी मतदाता पहले और यादव दूसरे नंबर पर हैं। करहल से 2007, 2012 और 2017 लगातार तीन बार के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी यहां से जीत दर्ज करती आ रही है। करहल विधानसभा सैफई से करीब ही है। यहां सपा मुखिया के परिवार का दखल काफी रहता है। पिछले तीन बार से यहां सपा के सोबरन यादव विधायक बन रहे हैं। 2017 के चुनाव में सपा उम्मीदवार सोबरन सिंह यादव ने 104221 वोट पाकर भाजपा के राम शाक्य को 38405 वोट से शिकस्त दी थी। जातीय समीकरण के लिहाज से गोरखपुर सदर सीट की बात करे तो वर्तमान में यहाँ कुल 4,53,662 मतदाता हैं, जिनमें 2,43,013 पुरुष और 2,10,574 महिला हैं। इस सीट पर 95 हजार से अधिक कायस्थ मतदाता हैं, जबकि 55 हजार ब्राह्मण हैं। 25 हजार क्षत्रिय और 50 हजार के लगभग मुस्लिम मतदाता है। वैश्य मततदाता की संख्या भी 50 हजार से ज्यादा है। निषाद 25 हजार, दलित 25 हजार तो यादव 25 हजार बताए जाते हैं। वहीं, विश्वकर्मा 4 हजार, पंजाबी 7 हजार, सिंधी 7 हजार, बंगाली 6 हजार मतदाता हैं। शुरू में जनसंघ की सीट मानी जाने वाली इस सीट पर 1985 में कांग्रेस के सुनील शास्त्री ने जनसंघ से यह सीट छीन ली थी। हालांकि अगले ही चुनाव मे यानि 1989 में यह सीट फिर भाजपा के शिव प्रताप शुक्ला ने कांग्रेस से छीन ली। तब से इस सीट पर भाजपा का कब्जा है। यही कुछ वजहे हैं जिनके कारण अखिलेश के लिए करहल और योगी के लिए गोरखपुर का चयन उनके पार्टियों ने किया। क्योंकि यहाँ से इन नेताओं को कम समय और परिश्रम से विजय मिलने की गारंटी लगती है। इससे उन्हे प्रदेश में अन्य दलीय प्रत्याशियों के लिए चुनाव प्रचार करना आसान रहेगा।

 

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