कुशीनगर, (संवाददाता)। महज कल्पना करने से रोम-रोम सिहर उठता है कि बरसात का मौसम, उफनाई गंडक नदी, अंधेरी रात का वक्त, बिना पतवार नदी में लहरों के सहारे बहती नाव, नाव पर सवार 150 जिंदगियाँ और नेटवर्कविहीन मोबाइल। यानि जीवन बचने की कहीं से कोई संभावना नहीं दिख रही थी, बस ऐसा लग रहा...
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