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बैकफुट पर केंद्र, योगी विरोधियों की अब खैर नहीं !

By Shakti Prakash Shrivastva on March 24, 2025
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                                                                              शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

सत्य की सदैव जीत हुई है और आगे भी होती रहेगी। अनेकानेक धर्म ग्रंथों में इस आशय का उल्लेख मिलता है। सियासत के संदर्भ में भी इसे बखूबी देखा जा सकता है। उत्तर प्रदेश की सियासत में सिर्फ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लगभग आठ साल के कार्यकाल का ही विश्लेषण करें तो काफी हद तक आप इससे संतुष्ट हो जाएंगे। 2017 का वक्त था। योगी के नाम का बतौर उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री ऐलान होते ही दिल्ली के तख्ते पर काबिज कई लोगों को मानो काठ मार गया। उनके सपने एक झटके में बिखर गए। कुछ समय तो उन्हे अपने आप को संभालने में लग गए। बाद में जब मनःस्थिति सामान्य हुई तो उनका समवेत प्रयास ये होने लगा कि कैसे योगी आदित्यनाथ को नियंत्रित रखें। गुजराती सियासत की सफलता का मूल इसके लिए भी अपनाया जाने लगा। लेकिन पहले ही दिन से योगी के तेवर और अलग कार्यशैली ने केंद्र की किसी भी गुजराती चाल को यहाँ सफल नहीं होने दिया। धर्म के साथ-साथ सियासत को सेवा का माध्यम मानने वाले योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या में पहले की मुकाबले कुछ खास बदलाव नहीं हुआ। वो पूर्ववत जनता दर्शन और क्षेत्र भ्रमण का कार्यक्रम जारी रखे। ईमानदार थे ईमानदार बने रहे। सत्य का साथ कभी नहीं छोड़ा। बस अंतर ये कि उनके कार्य क्षेत्र का क्षेत्रफल जरूर बढ़ गया। योगी को जानने वाले यह बखूबी जानते है कि योगी आदित्यनाथ स्वयं में सौ फीसद ईमानदार और मेहनती है। धर्म आधारित सत्य के पक्षधर हैं। यही वजह है कि इनके खिलाफ चल रहे हर तरह की सियासी साजिश पर उनके जानने वालों का अगाध विश्वास है कि जीत इन्ही की होगी और अभी तक ऐसा होता भी रहा है। केंद्र से भेजे गए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हों या महामहिम राज्यपाल। या फिर समय-समय पर खड़ी की जाने वाली विषम परिस्थितियाँ। सब पर हरदम भारी साबित हुए योगी आदित्यनाथ। हाल में जब गाजियाबाद के लोनी विधायक नन्द किशोर गुर्जर ने योगी समेत उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाया तो एक बार फिर पहले की तरह सियासी गलियारे में इसे योगी के खिलाफ शाह की सियासत के रूप में देखा जाने लगा। लेकिन योगी आदित्यनाथ इन सियासी चालों से बेफिक्र अपने अंदाज में पहले की ही तरह प्रदेश भ्रमण और निर्धारित कार्यक्रमों के निष्पादन में लगे रहे। लेकिन इस बार पूर्व की भांति नहीं हुआ बल्कि गुर्जर के बयान पर केंद्र में बैठा आलाकमान अपेक्षा के विपरीत हरकत में आया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड़ड़ा के निर्देश पर पार्टी के प्रदेश इकाई के अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह ने लोनी क्षेत्र के बीजेपी विधायक नन्द किशोर गुर्जर को कारण बताओ नोटिस थमाते हुए एक सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा। इतना ही नहीं पत्र मे यह चेतावनी भी उल्लखित है कि ऐसे कृत्य के लिए क्यों न आपके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। पार्टी के प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ला की मुताबिक पार्टी के संज्ञान में आया है कि पिछले कुछ समय से नंद किशोर गुर्जर द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर सरकार की आलोचना की जा रही है।

उनकी मुताबिक नोटिस में यह भी कहा गया है कि आपके वक्तव्यों व कृत्यों से पार्टी की प्रतिष्ठा को आघात पहुंच रहा है, जो कि अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। हाल ही में उन्होंने गाजियाबाद में कलश यात्रा निकाली थी, जिसमें पुलिस के साथ विधायक और उनके समर्थकों की झड़प भी हुई थी। जिसके बाद उन्होंने मुख्य सचिव और गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नर को सार्वजनिक मंच से चुनौती भी दी थी।

इस तरह अब केंद्र की इस कार्रवाई से यह एहसास हो रहा है कि पार्टी आलाकमान योगी के मामले में बैकफुट पर आने लगा है। क्योंकि इसके पहले अनेकानेक नेताओं ने योगी विरोध का दुस्साहस किया लेकिन किसी से कोई ऐसी पत्र बाजी नहीं हुई। बहरहाल देर आए दुरुस्त आए।

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